बाल मधुमेह की समय पर पहचान से बचाई जा सकती है बच्चों की जिंदगी

छग

Update: 2026-06-08 15:47 GMT
Raigarh. रायगढ़। बच्चों में तेजी से बढ़ रही टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्टर के निर्देश पर आयोजित इस प्रशिक्षण में जिले के 70 स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों एवं लेडी हेल्थ विजिटर्स ने भाग लिया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को बच्चों में होने वाले टाइप-1 डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समयानुकूल उपचार, परामर्श और दीर्घकालिक प्रबंधन संबंधी तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि समुदाय स्तर पर प्रभावित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन, रोगी एवं परिजनों की काउंसलिंग, रोगी सहायता समूहों की भूमिका,
समुदाय आधारित
जागरूकता रणनीतियों तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सहयोग के महत्व जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों और अनुभव साझा कर विषय की व्यावहारिक समझ विकसित की। जिला कार्यक्रम प्रबंधक रंजना पैकरा ने बताया कि बच्चों में मधुमेह की समय पर पहचान और उपचार अत्यंत आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता वृद्धि के साथ-साथ समुदाय में जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इसे बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल बताया।
क्या हैं टाइप-1 डायबिटीज के प्रमुख लक्षण
विशेषज्ञों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण सामान्यतः तेजी से दिखाई देते हैं। इनमें बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन कम होना, कमजोरी एवं थकान, धुंधला दिखाई देना, घावों का देर से भरना तथा बच्चों में चिड़चिड़ापन या व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
स्वस्थ जीवनशैली से मिल सकती है मदद
कार्यशाला में संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण, मीठे पेय पदार्थों से परहेज, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच तथा बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली की आदतें विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। कार्यक्रम में जिला एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. कैनन डेनियल, सहायक नोडल सलाहकार डॉ. सुमित मंडल, जिला सिकल सेल नोडल अधिकारी डॉ. जावेद तथा डीपीएचएन सीमा बरेठ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।
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