Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक बार फिर धर्मांतरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पचपेड़ी थाना क्षेत्र के जोंधरा गांव में आयोजित एक प्रार्थना सभा ने गांव का माहौल गरमा दिया। आरोप लगाया गया है कि प्रार्थना और भजन-कीर्तन की आड़ में ग्रामीणों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। वहीं, ईसाई समुदाय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ कार्यक्रम था। जानकारी के अनुसार, जोंधरा गांव में शनिवार को एक ग्रामीण के घर पर प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण शामिल हुए। सभा के दौरान भजन-कीर्तन गाए जा रहे थे और लोग धार्मिक गीतों पर तल्लीन थे। लेकिन इसी बीच गांव के कुछ लोगों ने इस कार्यक्रम को धर्मांतरण की गतिविधि बताते हुए आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यह सभा केवल धार्मिक प्रार्थना का रूप नहीं बल्कि धीरे-धीरे लोगों को बहकाकर और लालच देकर धर्म बदलवाने की कोशिश है।
विवाद की खबर फैलते ही गांव में तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से गांवों में इस तरह की गतिविधियां की जा रही हैं और भोले-भाले, गरीब और अशिक्षित लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उनका आरोप था कि ग्रामीणों को प्रलोभन स्वरूप पैसे, नौकरी और अन्य सुविधाओं का झांसा दिया जाता है। उधर, ईसाई समुदाय से जुड़े लोगों ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि यह मात्र प्रार्थना सभा थी, जिसमें किसी प्रकार के धर्मांतरण की बात नहीं की गई। उनका कहना है कि लोग अपनी आस्था और श्रद्धा से इसमें शामिल होते हैं और किसी को धर्म बदलने के लिए न तो प्रेरित किया जाता है और न ही बाध्य किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर धार्मिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
घटना की सूचना पाकर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाइश दी। पुलिस ने विवाद को शांत कराने की कोशिश की और शांति बनाए रखने की अपील की। हालांकि, इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस हुई और मामला थाने तक पहुंच गया। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। पचपेड़ी थाना प्रभारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि वास्तव में सभा में क्या हुआ था। यदि धर्मांतरण से जुड़ी कोई अवैध गतिविधि सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद जोंधरा गांव और आसपास के क्षेत्रों में हल्का तनाव फैल गया है। ग्रामीणों में असुरक्षा और भय का माहौल है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि गांवों में इस तरह की गतिविधियां बंद नहीं हुईं तो वे बड़े आंदोलन की राह पकड़ेंगे। उनका कहना है कि धर्मांतरण रोकना समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, ईसाई समुदाय ने मांग की है कि उन पर लगे झूठे आरोपों की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए। बिलासपुर जिले में यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों से लगातार इस तरह के विवाद सामने आते रहे हैं। कई गांवों में प्रार्थना सभाओं को लेकर सवाल उठे हैं और हिंदू संगठनों ने बार-बार धर्मांतरण का आरोप लगाया है। वहीं, ईसाई समुदाय हर बार इन आरोपों को नकारता आया है और इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखता है। फिलहाल, जोंधरा गांव का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग अलग-अलग राय रख रहे हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि धर्मांतरण का मुद्दा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि अन्य का मानना है कि गांवों में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए। पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अगर जांच में धर्मांतरण की बात साबित होती है तो निश्चित ही इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। वहीं, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।