कृषक उन्नति योजना बन रही आर्थिक उन्नति का मजबूत आधार: कृषक उत्तर कुमार प्रधान

छग

Update: 2026-01-19 12:48 GMT
Mahasamund. महासमुंद। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना जिले के किसानों के लिए आर्थिक संबल का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और किसान हितैषी ढंग से संचालित की जा रही है। महासमुंद जिले में इस योजना का सीधा लाभ हजारों किसानों को मिल रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। जिले में 18 जनवरी 2026 तक 182 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से कुल 7 लाख 67 हजार 780 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। वहीं अब तक 5 लाख 18 हजार 507.40 मीट्रिक टन धान के डी.ओ. (डिलीवरी ऑर्डर) जारी किए गए हैं। जारी डी.ओ. के विरुद्ध 2 लाख 97 हजार 487.26 मीट्रिक टन धान का उठाव भी हो चुका है। यह आंकड़े जिले में धान खरीदी व्यवस्था की सक्रियता और सुचारू संचालन को दर्शाते हैं।

धान उपार्जन केंद्रों पर टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक तौल, नमी परीक्षण और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही माइक्रो एटीएम के माध्यम से तत्काल नकद निकासी की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। किसानों का कहना है कि अब धान बेचने की प्रक्रिया न केवल आसान हुई है, बल्कि समय की भी बचत हो रही है। इसी क्रम में बसना विकासखंड के ग्राम कोलिहादेवरी निवासी कृषक उत्तर कुमार प्रधान ने कृषक उन्नति योजना को किसानों की आर्थिक उन्नति का पर्याय बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्णु सरकार के सुशासन में किसान खुश हैं और कृषि क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

श्री प्रधान ने बताया कि शासन द्वारा 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी किए जाने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे खेती-किसानी के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब धान की खेती अधिक लाभकारी हो गई है। अंतर की राशि का भुगतान भी समय पर हो रहा है, जो किसानों के लिए बड़ी राहत है। उन्होंने इसे साय सरकार की संवेदनशील और किसान हितैषी नीति बताया। उत्तर कुमार प्रधान ने बताया कि उन्होंने कुल 11 एकड़ भूमि में धान की खेती की थी, जिससे लगभग 200 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ। इस वर्ष प्राप्त होने वाली राशि से वे अतिरिक्त कृषि भूमि खरीदने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि धूमाभांठा धान उपार्जन केंद्र में पहले टोकन पर उन्होंने 50 क्विंटल और दूसरे टोकन पर 99.60 क्विंटल धान का विक्रय किया।

केंद्र पर पहुंचते ही नमी जांच, तौल और अन्य सभी प्रक्रियाएं शीघ्रता से पूरी हो गईं और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने उपार्जन केंद्रों पर किसानों को समय पर टोकन जारी करने, तौल और भुगतान में देरी न होने की व्यवस्था की सराहना की। श्री प्रधान ने कहा कि लंबे समय से वे खेती के लिए जमीन खरीदने की योजना बना रहे थे, लेकिन पूंजी की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। इस बार शासन द्वारा 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी किए जाने से उनका यह सपना साकार होने की दिशा में बढ़ रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि धान पर दी जा रही यह दर पूरे देश में सबसे अधिक है, जो किसानों के लिए एक स्वागत योग्य और ऐतिहासिक कदम है। कृषक उन्नति योजना न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
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