अनुसूचित क्षेत्र ट्रांसफर में ‘एवजी न मिलने’ का बहाना नहीं चलेगा, कर्मचारी को 20 दिन में रिलीव करने का आदेश

छग

Update: 2026-07-05 11:01 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण और कार्यमुक्ति (रिलीविंग) को लेकर एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट निर्णय दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कहा है कि यदि किसी कर्मचारी का तबादला एक अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) से दूसरे अनुसूचित क्षेत्र में किया गया है, तो विभाग “स्थानापन्न (Substitute/एवजी) कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने” का कारण बताकर उसकी रिलीविंग नहीं रोक सकता। अदालत ने याचिकाकर्ता को 20 दिनों के भीतर कार्यमुक्त करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।
यह मामला नारायणपुर जिले में पदस्थ रेडियोग्राफर चंद्रशेखर मंडावी से जुड़ा है। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि वह वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ओरछा, नारायणपुर में रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं। राज्य शासन ने 26 जून 2025 को उनका तबादला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आमाबेड़ा, कांकेर में कर दिया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि तबादला आदेश जारी होने के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग उन्हें कार्यमुक्त नहीं कर रहा है, जिसके कारण वे नई जगह पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से उनका करियर और सेवा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि सरकार के 07 जनवरी 2026 के परिपत्र के अनुसार, जब तक स्थान पर किसी अन्य कर्मचारी की व्यवस्था (एवजी) नहीं हो जाती, तब तक संबंधित कर्मचारी को रिलीव नहीं किया जा सकता। शासन ने यह भी तर्क दिया कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदों को खाली नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि शासन के इस परिपत्र की व्याख्या केवल सीमित परिस्थितियों में ही लागू होती है। कोर्ट ने कहा कि यह रोक तभी लागू हो सकती है जब किसी कर्मचारी का तबादला अनुसूचित क्षेत्र से गैर-अनुसूचित क्षेत्र में किया जा रहा हो।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता का तबादला ओरछा (नारायणपुर) से आमाबेड़ा (कांकेर) के बीच हुआ है और दोनों ही स्थान छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में विभाग द्वारा “एवजी उपलब्ध नहीं होने” का कारण देकर रिलीविंग रोकना नियमों की गलत व्याख्या है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी को अनावश्यक रूप से एक ही स्थान पर रोकना नहीं है, बल्कि सेवा की सुचारू व्यवस्था बनाए रखना है। लेकिन इस प्रक्रिया में नियमों की गलत व्याख्या कर कर्मचारी के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि यदि कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो राज्य सरकार को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 20 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को स्थानांतरण आदेश के अनुसार कार्यमुक्त करना होगा। इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर और रिलीविंग से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि विभाग “एवजी उपलब्ध नहीं है” जैसे कारणों का इस्तेमाल हर परिस्थिति में नहीं कर सकते, खासकर तब जब दोनों स्थान समान प्रशासनिक श्रेणी के भीतर आते हों।
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