शिक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई, कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर 38 सहायक शिक्षक निलंबित
छग
Kanker. कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में शिक्षा विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए 38 सहायक शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। इन शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने राज्य सरकार की ‘युक्तियुक्तकरण’ प्रक्रिया के तहत मिली नई पदस्थापना वाले विद्यालयों में अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया। विभाग ने इसे शासकीय आदेशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता मानते हुए यह सख्त कदम उठाया है। यह कार्रवाई राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण योजना के अंतर्गत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षक-विहीन और एकल-शिक्षक स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना है। इस योजना के तहत कांकेर जिले में कई विद्यालयों में पदों की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया गया था। जहां शिक्षकों की संख्या अधिक थी, वहां से अतिशेष शिक्षकों को उन स्कूलों में पदस्थ किया गया, जहां लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई थी।
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) रमेश कुमार ने बताया कि युक्तियुक्तकरण के तहत अतिशेष घोषित किए गए इन सहायक शिक्षकों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया गया था। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे जुलाई 2025 तक अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करें। बावजूद इसके, संबंधित शिक्षकों ने आदेश का पालन नहीं किया। डीईओ के अनुसार, कई शिक्षकों ने अपनी नई पदस्थापना के खिलाफ जिला स्तर पर अपील दायर की थी। विभाग द्वारा नियमानुसार सुनवाई की गई, लेकिन जांच के बाद सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया। अपील खारिज होने के बावजूद भी शिक्षकों ने स्कूलों में योगदान नहीं दिया, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया। शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को तीन से चार बार स्पष्टीकरण नोटिस जारी किए। नोटिस के माध्यम से उन्हें अंतिम अवसर भी दिया गया कि वे कार्यभार ग्रहण करें या संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करें। लेकिन विभाग के अनुसार, न तो उन्होंने स्कूल ज्वाइन किया और न ही कोई ठोस कारण प्रस्तुत किया।
इसके बाद लगातार अनुपस्थिति और आदेशों की अनदेखी को आधार बनाकर निलंबन की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद जिले के शैक्षणिक और शिक्षक समुदाय में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ शिक्षक संगठनों ने इसे कठोर कदम बताया है, वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए यह निर्णय जरूरी था। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासकीय स्कूलों में छात्रों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए यह अनिवार्य है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें और विभागीय आदेशों का पालन करें। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी यदि कोई शिक्षक युक्तियुक्तकरण या अन्य प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि इस कदम से शिक्षक-विहीन स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और जिले की शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।