भारत

सोमनाथ मंदिर में PM मोदी ने उठाया त्रिशूल

SHIDDHANT
10 Jan 2026 9:27 PM IST
सोमनाथ मंदिर में PM मोदी ने उठाया त्रिशूल
x
देखे वीडियो
Gujrat गुजरात: ऐतिहासिक और पवित्र सोमनाथ मंदिर में चल रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान एक अद्भुत और भव्य दृश्य देखने को मिला। 72 घंटे तक निरंतर ‘ओम’ मंत्रोच्चार के बीच जब शाम ढली, तो सोमनाथ मंदिर के ऊपर का आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा। इस अलौकिक नज़ारे ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जो आस्था, संस्कृति और भारत के गौरवशाली इतिहास के 1000 वर्षों के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है। इस पर्व के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आध्यात्मिक आयोजनों की श्रृंखला चल रही है।


72 घंटे तक चलने वाला ‘ओम’ मंत्रोच्चार इस पर्व का प्रमुख आकर्षण रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान आचार्यों और संतों द्वारा सामूहिक रूप से मंत्रोच्चार किया गया, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता नजर आया। श्रद्धालुओं का कहना है कि लगातार मंत्रोच्चार के कारण मंदिर परिसर में एक विशेष शांति और सकारात्मकता महसूस की जा रही है। आतिशबाजी के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। जैसे ही आसमान में रोशनी बिखरी, “
हर-हर महादेव
” और “ओम नमः शिवाय” के जयघोष गूंज उठे। यह दृश्य न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत भव्य और यादगार बन गया।
प्रशासन और श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पार्किंग, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सहायता और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका। स्वाभिमान पर्व के दौरान सोमनाथ मंदिर को विशेष रोशनी से सजाया गया है। रात के समय मंदिर की भव्यता और अधिक निखरकर सामने आ रही है। रोशनी और आतिशबाजी के साथ मंदिर का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आने वाले दिनों में भी कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, इस पर्व का उद्देश्य देशवासियों में सांस्कृतिक गौरव, आध्यात्मिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करना है। आतिशबाजी और मंत्रोच्चार के इस संगम ने यह संदेश दिया कि सोमनाथ न केवल अतीत की गौरवगाथा है, बल्कि वर्तमान और भविष्य में भी भारतीय संस्कृति और आस्था का मजबूत स्तंभ बना रहेगा।
Next Story