Raigarh. रायगढ़। जिले में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशानुसार राजस्व पखवाड़ा के तहत गांव-गांव में शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों का उद्देश्य राजस्व संबंधी प्रकरणों का त्वरित और प्रभावी निराकरण करना है, ताकि किसानों और ग्रामीणों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान हो सके। इस क्रम में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने रायगढ़ तहसील के ग्राम पंचायत कोतरलिया में आयोजित राजस्व शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने उपस्थित किसानों और ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनी और अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक आवेदन का नियमानुसार और समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि शिविरों का संचालन सुव्यवस्थित, पारदर्शी और परिणाममुखी होना चाहिए ताकि आमजन को वास्तविक लाभ मिल सके।
कलेक्टर ने विशेष रूप से अविवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, नक्शा बटांकन और व्यपवर्तन जैसे लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। फौती नामांतरण, बंटवारा और अभिलेख त्रुटि सुधार से जुड़े आवेदनों का शिविर स्थल पर ही ऑनलाइन पंजीयन, सुनवाई और निराकरण करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिविर में आने वाले प्रत्येक हितग्राही को सहज और सम्मानजनक वातावरण मिले तथा किसी प्रकार की असुविधा न हो। शिविरों में अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए कोटवारों और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे ने पुसौर तहसील के ग्राम गढ़उमरिया में आयोजित शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने शिविरों के प्रभावी संचालन और समयबद्ध निराकरण पर विशेष बल दिया। राजस्व पखवाड़ा अभियान तीन चरणों में संचालित किया जा रहा है।
प्रथम चरण 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, द्वितीय चरण 4 मई से 18 मई, और तृतीय चरण 1 जून से 15 जून 2026 तक। अभियान के तहत अविवादित नामांतरण और खाता विभाजन के लंबित प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण, सीमांकन और व्यपवर्तन के मामलों का निपटारा, नक्शा बटांकन की प्रगति और खातों में आधार, मोबाइल नंबर एवं अन्य प्रविष्टियों का अद्यतन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही आरबीसी 6-4 के अंतर्गत जनहानि और फसल क्षति के मामलों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। भू-अर्जन प्रकरणों का समय-सीमा में निपटारा, स्वामित्व योजनांतर्गत अधिकार अभिलेखों का वितरण, कृषि सांख्यिकी आंकड़ों का अद्यतन, अभिलेख शुद्धता से जुड़े प्रकरणों का निराकरण और बी-01, खसरा और किसान किताब से संबंधित आवेदनों का मौके पर समाधान किया जा रहा है। शिविरों में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के आवेदनों की ऑनलाइन प्रविष्टि लोक सेवा केन्द्र के माध्यम से की जा रही है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। राजस्व पखवाड़ा के माध्यम से प्रशासन की यह पहल ग्रामीणों और किसानों के लिए राहतकारी साबित हो रही है। मौके पर ही समस्याओं का निराकरण होने से ग्रामीणों में संतोष का भाव है और शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।