Chhuikhadaan में खनन परियोजना पर घमासान, 5 गांवों के लोग विरोध में एकजुट
छग
Bhilai/Khairagarh. भिलाई/खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई क्षेत्र में प्रस्तावित चुना पत्थर खदान को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर उग्र हो गया है। छुईखदान के पास स्थित पांच गांव — संडी, भैंसबोड़, बड़गांव, कोसमतरा और भावेद के सैकड़ों ग्रामीण सोमवार को भिलाई स्थित पर्यावरण संरक्षण मंडल कार्यालय का घेराव करने पहुंचे। ग्रामीणों के हाथों में तिरंगा था, जिससे उन्होंने शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ विरोध का संदेश दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान खुलने से जलस्रोतों का दोहन होगा, भूमिगत जलस्तर प्रभावित होगा और गांवों का पर्यावरण पूरी तरह बिगड़ जाएगा। इसके अलावा क्षेत्र की कृषि उपज, पशुधन और ग्रामीण जीवन पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका ग्रामीणों ने जताई है। उनका कहना है कि खदान कंपनी की ओर से गलत जानकारी देकर अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है।
जबकि स्थानीय निवासियों को किसी भी प्रकार की सहमति प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। मंडल कार्यालय पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की और खदान की अनुमति रद्द करने की मांग की। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, किसान, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया कि उनकी आपत्तियों को उचित प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जाएगा। पुलिस ने यह भी अपील की कि किसी भी प्रकार के तनावपूर्ण माहौल को रोकने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखें।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर खदान नहीं खुलने देंगे। उनका तर्क है कि चुना पत्थर खदानों से निकलने वाली धूल और रासायनिक तत्व हवा और पानी को जहरीला करते हैं। इससे गांवों में स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ेंगे और बच्चों व बुजुर्गों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खदान का क्षेत्र गांवों के कृषि रकबे के बेहद पास है, जिससे फसलें प्रभावित होंगी और आजीविका पर संकट आ जाएगा। पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने ग्रामीण प्रतिनिधियों से ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक खदान की अनुमति पूरी तरह रद्द नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। छुईखदान क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में खनन गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर पहले भी विरोध हुए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि विकास योजनाओं के नाम पर उनके प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दुरुपयोग किया जा रहा है।