Baloda Bazar. बलौदाबाजार। जिले के बहुचर्चित सूदखोरी मामले में आखिरकार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी दंपति पिंकी सिन्हा और उसके पति हेमलाल सिन्हा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 506 और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। हालांकि, अब तक पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। यह मामला लंबे समय से शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था। बताया जा रहा है कि बलौदाबाजार में सक्रिय यह सूदखोरी नेटवर्क अब रायपुर तक फैला हुआ है। प्रार्थी हेमंत कनौजे के बैंक और फोन पे स्टेटमेंट से इस नेटवर्क के कई और नामों के जुड़ने के संकेत मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
प्रेस क्लब तक पहुंचा पीड़ित
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब पीड़ित हेमंत कनौजे अपनी व्यथा लेकर बलौदाबाजार प्रेस क्लब पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि किस तरह सूदखोरों ने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया। प्रेस क्लब अध्यक्ष नरेश गनशानी और अन्य पत्रकारों ने मामले की गंभीरता को समझा और इसे सिर्फ व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि जनहित का विषय माना। पत्रकारों ने न केवल इस मामले को समाचार पत्रों के माध्यम से उजागर किया, बल्कि प्रशासन को भी लिखित में अवगत कराया। ज्ञापन कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और सिटी कोतवाली थाना प्रभारी समेत कई जिम्मेदार अधिकारियों को सौंपा गया।
अपराधियों ने की दबाने की कोशिश
मामला जैसे ही सामने आया, आरोपियों ने सबसे पहले इसे दबाने की कोशिश की। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पत्रकारों को खरीदने तक का प्रयास किया। लेकिन जब इसमें सफलता नहीं मिली, तो पत्रकारों के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने की रणनीति अपनाई गई। पत्रकारों पर बढ़ते दबाव और दुष्प्रचार के बीच प्रेस क्लब ने फिर से प्रशासन को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की।
पीड़ित पर भी बढ़ा दबाव
इसी बीच, आरोपियों ने प्रार्थी हेमंत कनौजे को भी चुप कराने की कोशिश की। कभी उन्हें लालच दिया गया तो कभी धमकियां देकर डराने की साजिश रची गई। लेकिन पीड़ित ने हार नहीं मानी और लगातार मामले को सामने लाने का प्रयास किया।
पत्रकारों का अडिग रुख
पत्रकारों ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ कलम की लड़ाई नहीं है। अगर जरूरत पड़ी तो वे सड़क पर उतरकर भी जनता की आवाज बनेंगे और शासन-प्रशासन तक सच पहुंचाएंगे। प्रेस क्लब का यह रुख आम जनता में भरोसा जगाने वाला साबित हुआ। लोगों ने माना कि पत्रकारिता सिर्फ खबर लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ समाज को खड़ा करने की जिम्मेदारी भी है।
पुलिस जांच जारी
फिलहाल पुलिस ने आरोपी दंपति पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, गिरफ्तारी न होने से लोगों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों कर रही है। दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि पुलिस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की जानकारी जुटा रही है ताकि पूरे गिरोह को पकड़ा जा सके। इस मामले ने पूरे बलौदाबाजार जिले में आक्रोश का माहौल बना दिया है। लोग मांग कर रहे हैं कि सूदखोरी जैसे अमानवीय काम में शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, पत्रकारों की सक्रियता और प्रशासन तक आवाज पहुंचाने की भूमिका ने जनता में उम्मीद जगाई है।