गांजा तस्करी मामले में आरोपी को 5 साल की जेल और 30 हजार रुपये का अर्थदंड
छग
Mahasamund. महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में गांजा तस्करी के एक गंभीर मामले में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश संघपुष्पा भतपहरी ने ओडिशा के बलांगीर जिले के निवासी अभिमन्यु घीभेला (29) को दोषी करार देते हुए उसे 5 साल की कैद और 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह सजा एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 (ख) (।।) (ख) के तहत सुनाई गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी अर्थदंड का भुगतान नहीं करता है, तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
अभिमन्यु घीभेला ग्राम सागुनभाड़ी, बलांगीर का रहने वाला है। घटना 23 फरवरी 2024 को खल्लारी थाना क्षेत्र में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस टीम एमके बाहरा के पास गश्त कर रही थी, तभी उन्होंने एक सिल्वर रंग की बोलेरो गाड़ी के इंजन से धुआं निकलते देखा। संभावित जानमाल नुकसान की आशंका में पुलिस ने वाहन को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, चालक ने गाड़ी को तेजी से भगा दिया। पुलिस ने पीछा किया, जिसके बाद वाहन चालक ने पेड़ों से रगड़ते हुए गाड़ी को एक दीवार से टकरा दिया और गाड़ी रुक गई। इंजन से निकल रहे धुएं और गांजे जैसी गंध को महसूस कर पुलिस ने तुरंत गाड़ी की तलाशी ली। तलाशी के दौरान गाड़ी से कुल 7 किलो 100 ग्राम गांजा बरामद किया गया। गांजा जब्त होने के बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया।
विवेचना पूरी होने पर आरोपियों के खिलाफ केस कोर्ट में पेश किया गया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नूतन साहू ने पैरवी की। विशेष न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत मादक पदार्थों की तस्करी गंभीर अपराध है, और ऐसे मामलों में सख्त दंड अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और अपराधियों को किसी भी प्रकार की शिथिलता का लाभ नहीं मिलना चाहिए। अभियुक्त अभिमन्यु घीभेला की गिरफ्तारी और सजा से यह संदेश गया है कि पुलिस और न्यायालय ऐसे मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ गंभीरता से कार्रवाई कर रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना दें ताकि ऐसे अपराधों की रोकथाम की जा सके। इस घटना ने छत्तीसगढ़ में एनडीपीएस एक्ट के तहत मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों पर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत को फिर से रेखांकित किया है। पुलिस और प्रशासन की तत्परता से ही ऐसे मामलों में न केवल अपराधियों को पकड़ा जा सकता है, बल्कि समाज में नशीले पदार्थों के खिलाफ संदेश भी मजबूत होता है।