हिस्ट्रीशीटर मुकेश बनिया की ‘हिसाब-किताब डायरी’ वायरल

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Update: 2026-01-20 18:17 GMT
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हिस्ट्रीशीटर मुकेश बनिया, जो लंबे समय से ड्रग पैडलिंग, सट्टा और अवैध शराब कारोबार में सक्रिय था, ने कथित तौर पर अपनी हिसाब-किताब की डायरी तैयार कर रखी थी। इस डायरी में कई पुलिस अफसरों, साइबर क्राइम टीम के अधिकारियों और पत्रकारों को दिए गए कथित “प्रोटेक्शन मनी” का विवरण दर्ज है। डायरी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें साल 2025 की तारीखों के अनुसार, मुकेश बनिया ने हर महीने कितने पैसे किसे दिए, इसका पूरा लेखा-जोखा लिखा गया है। इसके अलावा, एक पेज पर कितना किलो गांजा किस-किस सप्लायर को सप्लाई किया गया, इसकी पूरी डिटेल भी मौजूद है। तीसरे पेज में कोतवाली थाना पुलिस को दिए गए पेमेंट का हिसाब लिखा है।
जनता से रिश्ता इस वायरल डायरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है हो सकता है ये डायरी सोशल मीडिया में सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से भी वायरल की गई हो ये जांच का विषय है।


मामले को लेकर शहर में चर्चा है कि रायपुर के क्राइम ब्रांच के नए टीआई को जब मुकेश बनिया के अपराध और डायरी की जानकारी मिली, तो उन्होंने पूरे जोश-ख़रोश के साथ कार्रवाई की। सूत्रों के अनुसार, मुकेश को “सियार” बनाकर उल्टा लटकाकर पीटा गया, जिसके बाद उसने डायरी में पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों के नाम लिखकर सौंप दी। डायरी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया में इस पर बहस तेज हो गई। आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने अपनी पोस्ट में इस डायरी के पन्नों को शेयर किया। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डायरी में लिखी जानकारी की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन यह मामला रायपुर के थानों में लंबे समय से चल रहे कथित भ्रष्टाचार और संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।



पुलिसकर्मियों की लंबी तैनाती और प्रभाव

शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह है कि एक ASI पाठक चाचा पिछले 25 वर्षों से राजधानी के थानों में तैनात हैं। ट्रांसफर के नियमों के बावजूद, वह सिर्फ कोतवाली, पुरानी बस्ती, गंज और टिकरापारा के बीच ही तैनात रहे। नियमों के अनुसार, पुलिसकर्मी को सीमित अवधि के बाद अन्य जिले या क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए, लेकिन यह केवल कागजों तक ही सीमित रहा। समान स्थिति राजधानी के सटे आरंग क्षेत्र में भी देखने को मिली है, जहां एक नगर सैनिक लंबे समय से एक ही थाने में तैनात है और उसका प्रभाव इतना बढ़ गया है कि थाना प्रभारी भी कई मामलों में उसके बिना कार्रवाई नहीं कर पाते।

सट्टा, गांजा और अवैध शराब के ठिकाने
शहर के कई थाना क्षेत्रों में यह आम चर्चा है कि सट्टा, गांजा और अवैध शराब के ठिकानों की जानकारी पुलिस के पास है, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही। सूत्रों के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मी हर महीने मोटी रकम वसूलते हैं और बदले में अपराधियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। यही कारण है कि अपराधी बेखौफ होकर अपने धंधे चला रहे हैं। आरंग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नगर सैनिकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ नगर सैनिक लंबे समय से एक ही थाने में तैनात हैं और उनका प्रभाव इतना बढ़ गया है कि सुपरवाइजिंग अधिकारियों की भी कार्रवाई में देरी होती है। आरोप है कि उनकी शह पर नशा, अवैध शराब, जुआ-सट्टा और रेत उत्खनन फल-फूल रहे हैं।

डायरी की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, मुकेश बनिया ने यह डायरी अपने अलग-अलग अवैध व्यापारों की निगरानी के लिए तैयार की थी। इसमें शामिल है:
पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों को दिए गए प्रोटेक्शन मनी का विवरण
विभिन्न सप्लायरों को वितरित गांजा की मात्रा
कोतवाली थाना द्वारा किए गए पेमेंट का हिसाब
सट्टा और जुए से अर्जित मासिक आमदनी का लेखा-जोखा
डायरी में कथित तौर पर यह भी दर्ज था कि किस दिन कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी पैसे प्राप्त करते थे। हालांकि, रायपुर पुलिस और प्रशासन ने मामले की सत्यता की पुष्टि से इंकार किया है।


सोशल मीडिया में वायरल
आज यह डायरी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। कई नागरिक और एक्टिविस्टों ने इसे शेयर कर सवाल उठाए हैं कि राजधानी में लंबे समय से किस प्रकार से अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों में पुलिस की मिलीभगत चल रही है। इस वायरल डायरी ने रायपुर के थानों में लंबे समय से चल रहे अवैध धंधे और संरक्षण व्यवस्था की पोल खोल दी है।

प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया
शहर के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले पर गहन जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह जांच इस बात की पुष्टि करेगी कि क्या डायरी में लिखी जानकारी वास्तविक है और किन अधिकारियों का नाम इस कारोबार से जुड़ा है। पुलिस ने साफ किया है कि कानूनी कार्रवाई के लिए सत्यापित प्रमाण आवश्यक हैं। इस बीच रायपुर की जनता और नागरिक समाज ने भी मांग की है कि अपराधियों और उनके संरक्षण में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

कोतवाली पेमेंट (11-11-2025) – संकलित विवरण

प्राप्तकर्ता/व्यक्तिराशि (रुपए)
दुबे साहब4000
माल खाना वाली मैडम1500
सैलेस भाई5000
पाठक चाचा10000
लहरे भाई2000
मददगार लोग स्टाफ 5,000
डायल 112 स्टाफ 10,000
रवि ठाकुर 150051
प्रविन प्रधान3000
सैलेस भाई7000
520D F15 2112 / THAIE2000
मंडावी साहब दो स्टार3500
सिद्धार्थ साहब दो स्टार4000
दुबे साहब एक स्टार3000
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