तकनीक के सहारे बदली धान खरीदी व्यवस्था, अब किसान घर बैठे काट रहे हैं अपना टोकन

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Update: 2026-01-19 18:00 GMT
Ambikapur. अंबिकापुर। जिले में धान उपार्जन व्यवस्था में किए गए नवाचार और तकनीकी सुधारों से किसानों का अनुभव पूरी तरह बदल गया है। अब धान बेचना न केवल आसान हुआ है, बल्कि किसानों को सम्मानजनक और सुव्यवस्थित प्रक्रिया का लाभ भी मिल रहा है। ग्राम पंचायत करजी के किसान उमाशंकर कुशवाहा ने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना की। कृषक कुशवाहा ने बताया कि उनके पास आठ एकड़ में धान की खेती है और वे इस वर्ष 150 क्विंटल धान का विक्रय कर रहे हैं। पहले टोकन कटवाने के लिए समिति केन्द्र जाना पड़ता था, जहां भीड़ और इंतजार किसानों की परेशानी बढ़ा देता था। लेकिन अब किसान तुहंर टोकन ऐप ने यह समस्या समाप्त कर दी है। मोबाइल फोन से घर बैठे टोकन कटने से समय की बचत हुई और अनावश्यक परेशानी से राहत मिली। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था किसानों को आत्मनिर्भर बना रही है। किसान अपनी सुविधा अनुसार टोकन काटकर सीधे उपार्जन केन्द्र
पहुंच रहे हैं।

इससे केन्द्रों पर अव्यवस्था कम हुई है और किसानों को बिना तनाव के धान विक्रय का अवसर मिल रहा है। करजी धान उपार्जन केन्द्र की व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कुशवाहा ने बताया कि केन्द्र पहुंचते ही गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाना तुरंत उपलब्ध कराया गया। पूरी प्रक्रिया तय समय में पूरी होने से किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं उठानी पड़ी। समिति के कर्मचारी भी लगातार किसानों का मार्गदर्शन और सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन द्वारा धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का सर्वाधिक समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। इससे प्राप्त राशि का उपयोग किसान अब फसल विविधीकरण में कर रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं। उमाशंकर कुशवाहा ने कहा कि किसान हितैषी नीतियों और पारदर्शी खरीदी व्यवस्था से अब प्रदेश का किसान आत्मविश्वास से भरा है। उन्होंने धान उपार्जन व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि शासन के इन प्रयासों से किसान सशक्त और खुशहाल हो रहे हैं।
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