Mahasamund. महासमुंद। जिले में चीनी के भंडारण और स्टॉक की निगरानी को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय, नवा रायपुर के निर्देशों के तहत अब जिले में चीनी के स्टॉक पर नियमित नजर रखी जाएगी। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार चीनी के भंडारण की अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी गई है। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना, जमाखोरी रोकना तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब कोई भी चीनी डीलर प्राप्त स्टॉक को 30 दिनों से अधिक समय तक अपने पास भंडारित नहीं रख सकेगा। इसके अलावा किसी भी समय और किसी भी स्थान पर एक डीलर के पास 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यापारी निर्धारित सीमा का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिले के सभी चीनी व्यापारियों का भारत सरकार के स्टॉक मॉनिटरिंग पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीयन कराया जाए। इस व्यवस्था में डीलर, ट्रेडर, स्टॉकिस्ट, आयातक और मिलर सभी शामिल होंगे। पंजीयन के साथ-साथ प्रत्येक व्यापारी को अपने पास उपलब्ध चीनी के स्टॉक की घोषणा भी पोर्टल पर करनी होगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी व्यापारिक संस्थानों को प्रत्येक शुक्रवार अपने चीनी स्टॉक की अद्यतन जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे प्रशासन को जिले में उपलब्ध चीनी की वास्तविक स्थिति की जानकारी समय-समय पर मिलती रहेगी और स्टॉक की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। कलेक्टर के निर्देश पर जिले में जल्द ही चीनी व्यापारियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में भारत सरकार की अधिसूचना, स्टॉक सीमा, पोर्टल पर पंजीयन की प्रक्रिया तथा अन्य आवश्यक नियमों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य व्यापारियों को नए नियमों से अवगत कराना और उनका पालन सुनिश्चित कराना है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अलावा तहसीलदारों और खाद्य निरीक्षकों को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें जिले के विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण करने और चीनी के स्टॉक का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान यदि किसी व्यापारी के पास निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का भंडारण पाया जाता है या स्टॉक संबंधी जानकारी छिपाई जाती है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य व्यापारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कृत्रिम कमी या जमाखोरी जैसी स्थितियों को रोकना है। नियमित निगरानी से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शासन द्वारा जारी सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निरीक्षण और निगरानी की कार्रवाई का नियमित प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया जाए, ताकि जिले में चीनी भंडारण संबंधी नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। प्रशासन ने सभी व्यापारियों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और समय पर स्टॉक संबंधी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करें, जिससे किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचा जा सके।