Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में शीतलहर और कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। तापमान लगातार गिरने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एफ. आर. निराला ने चेतावनी देते हुए कहा कि बंद कमरों में कोयला जलाकर सोना बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता का खतरा बढ़ जाता है और कई बार जान भी जा सकती है।
बंद कमरे में कोयला जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड का खतरा
डॉ. निराला ने बताया कि ठंड से बचने लोग अक्सर बंद कमरों में कोयला या लकड़ी का चूल्हा जलाकर सो जाते हैं। कोयले के अधजले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है, जो बिना गंध और रंग की होती है। यह गैस धीरे-धीरे कमरे में भरकर शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक देती है, जिससे बेहोशी, सांस रुकना और मौत तक हो सकती है। ऐसे मामलों की खबरें हर साल सामने आती हैं। उन्होंने सलाह दी कि यदि कोयला या लकड़ी का उपयोग करना ही पड़े, तो कमरे में उचित वेंटिलेशन जरूर रखें। दरवाजे-खिड़कियां पूरी तरह बंद न करें और कभी भी जलते कोयले के साथ सोने की भूल न करें।
अस्पतालों को अलर्ट, बेड और उपकरण तैयार रखने के निर्देश
CMHO ने जिले के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश जारी किया है कि शीतलहर से प्रभावित मरीजों के लिए अलग से बेड, उपकरण और उपचार व्यवस्था तैयार रखें। हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान असामान्य रूप से कम होना) की स्थिति में मरीजों को तत्काल गर्माहट और ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को ठंड से गंभीर जोखिम होता है। विभाग ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को इनके लिए प्राथमिकता व्यवस्था करने को कहा है।
क्या हैं हाइपोथर्मिया के लक्षण?
ठंड ज्यादा लगने पर शरीर का तापमान गिरने लगता है, जिससे निम्न लक्षण दिख सकते हैं—
लगातार कंपकपी
शरीर और त्वचा का कठोर होना
सांस लेने में कठिनाई
मांसपेशियों में ऐंठन
थकान, सुस्ती, बेहोशी
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को तुरंत गर्म जगह ले जाकर चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है।
लोगों को दिए गए महत्वपूर्ण दिशा–निर्देश
घर से बाहर कम निकलें, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग।
गर्म कपड़े, मफलर, दस्ताने और ऊनी टोपी पहनना अनिवार्य करें।
गांवों में सामुदायिक अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
शाम होते ही घर की खिड़कियां-दरवाजे बंद करें, लेकिन हवा आने-जाने की जगह अवश्य छोड़ें।
गर्म पेय पदार्थ लें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
छोटे बच्चों को मोजे, स्वेटर और कैप जरूर पहनाएं।
तापमान कम होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के समय में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
माताओं को विशेष चेतावनी—ठंडे शरीर से दूध न पिलाएं
एडवाइजरी में बताया गया है कि कई बार माताएं सुबह ठंड में जागकर तुरंत शिशु को दूध पिला देती हैं। इससे शिशु को ठंड लग सकती है, जिसके कारण दस्त, उल्टी और निमोनिया जैसे खतरे बढ़ जाते हैं। इसलिए माताओं को सुझाव दिया गया है कि पहले अपने शरीर को गर्म करें, फिर ही बच्चे को दूध पिलाएं। शीतलहर बढ़ने पर प्रशासन अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था, घुमंतू लोगों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर स्कूल टाइमिंग में बदलाव जैसे कदम उठा सकता है।