सिलाटी गांव में घर के सामने बैठा बीमार तेंदुआ, वन विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
छग
Kondagaon. कोंडागांव। जिले के ग्राम सिलाटी में उस समय दहशत फैल गई जब एक बीमार तेंदुआ गांव के एक घर के सामने दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि तेंदुआ बुधवार सुबह से ही उसी स्थान पर बैठा हुआ है, जिससे ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुआ काफी कमजोर और बीमार अवस्था में नजर आ रहा है। गांव में पहली बार इस तरह से किसी घर के पास तेंदुआ देखे जाने की घटना ने लोगों को चौंका दिया है। जैसे ही इसकी सूचना फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, जिससे स्थिति और भी संवेदनशील हो गई।
सूचना मिलने पर वन विभाग को तुरंत इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद केशकाल वन मंडल की डीएफओ दिव्या गौतम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। वन विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत क्षेत्र की घेराबंदी कर दी और ग्रामीणों को तेंदुए के पास जाने से सख्ती से मना किया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए की हालत देखकर स्पष्ट है कि वह बीमार हो सकता है। उसकी स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ टीम को बुलाने की तैयारी की जा रही है ताकि सुरक्षित तरीके से उसका रेस्क्यू किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकता तेंदुए को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पकड़ना और उसे उचित उपचार उपलब्ध कराना है।
ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से भीड़ न लगाने की सलाह दी गई है। वन विभाग की टीम लगातार मौके पर निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। गांव में तेंदुए की मौजूदगी से बच्चों और बुजुर्गों में विशेष रूप से डर का माहौल देखा जा रहा है। कई लोगों ने अपने घरों से बाहर निकलना भी कम कर दिया है। हालांकि वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। जंगली जानवर यदि बीमार या घायल हो जाएं तो वे अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में सही समय पर रेस्क्यू करना बेहद जरूरी होता है, ताकि जानवर और इंसान दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वन विभाग ने कहा है कि तेंदुए को सुरक्षित रूप से पकड़ने के बाद या तो उसे उपचार केंद्र भेजा जाएगा या फिर पूरी तरह स्वस्थ होने पर सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। फिलहाल मौके पर वन विभाग की टीम पूरी तरह सक्रिय है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। रेस्क्यू ऑपरेशन जल्द ही विशेषज्ञों की मदद से आगे बढ़ाया जाएगा। यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि वन्यजीव और मानव बस्तियों के बीच बढ़ता संपर्क कई बार जोखिमपूर्ण स्थिति पैदा कर देता है, जिसे समय पर नियंत्रण में लेना आवश्यक है।