नया मंगल बाजार और आश्रम के पीछे इदगाभाठा का इलाका अपराधियों और तस्करों का सबसे सुरक्षित ठिकाना
रामकुंड बन गया गांजा कुंड, तस्करों का डंपिग सेंटर ,नया मंगल बाजार आश्रम, नयापारा डबरी, गोल बाजार अपराधियों और तस्करों का सबसे सुरक्षित ठिकाना
तेलीबांधा क्षेत्र स्थित देवार बस्ती में पिछले कई वर्षों से गांजा के अवैध कारोबार का मुख्य केंद्र बना
तेलघानी नाका से लेकर गुढिय़ारी , रामनगर, लक्ष्मण नगर ,कोटा, मोहबा बाजार टाटीबंध कबीर नगर , खमतराई, भनपुरी, बिरगांव उड़ता पंजाब
राजधानी में अंतर्राज्यीय तस्करों का तगड़ा नेटवर्क, पुलिस की आंखों में धूल झोंककर कर रहे गांजा सप्लाई
रायपुर। तेलीबांधा क्षेत्र स्थित देवार बस्ती में पिछले कई वर्षों से गांजा के अवैध कारोबार का मुख्य केंद्र बना हुआ है। वही् रामकुंड तो गांजा तस्करों का डंपिग सेंटर बना हुआ है नया मंगल बाजार आस्रम से लगा हुआ क्षेत्र अपराधियों और तस्करों का सबसे सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। तेलघानी नाका से लेकर गुढिय़ारी , रामनगर, लक्ष्मण नगर ,कोटा, मोहबा बाजार टाटीबंध कबीर नगर , खमतराई, भनपुरी, बिरगांव तो उड़ता पंजाब बना हुआ है। भरत नगर स्थानीय रहवासियों का कहना है कि बस्ती में खुलेआम गांजा बेचने और खरीदने वालों की आवाजाही के चलते आसपास का माहौल लगातार खराब हो गया है। स्थिति यह है कि शाम के समय लोगों को अपने ही इलाके से गुजरने में डर लगने लगा है। मोहल्लेवासियों के मुताबिक, पुलिस को कई बार इस संबंध में सूचना दी जा चुकी है। उनका आरोप है कि पुलिस कभी-कभार कुछ लोगों को पकडक़र ले जाती है, लेकिन इनमें ज्यादातर गांजा खरीदने वाले होते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि असली विक्रेता कार्रवाई से बच निकलते हैं और कथित कारोबार लगातार जारी रहता है। हालात से परेशान होकर अब स्थानीय लोगों ने खुद जिम्मेदारी उठानी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि वे गांजा खरीदने के लिए आने वाले लोगों को पकडक़र उनका वीडियो बना रहे हैं और उसे पुलिस तक पहुंचा रहे हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वे इस इलाके में पिछले 50-60 वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात के कारण अब उन्हें अपना ही घर छोडऩे तक की नौबत महसूस हो रही है। मोहल्लेवासियों ने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कर गांजा के कथित कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि इलाके में फिर से सुरक्षित माहौल कायम हो सके।
रायपुर गांजा तस्करों का कारिडोर ! DRI ने 13 दिन में 500 किलो गांजा पकड़ा, पांच गिरफ्तार
राजधानी रायपुर एक बार फिर गांजा तस्करी के बड़े रूट के रूप में केंद्रीय एजेंसी डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की कार्रवाई में सामने आया है। पिछले करीब दो सप्ताह में ष्ठक्रढ्ढ ने रायपुर के आसपास गांजा तस्करी के खिलाफ दो बड़ी कार्रवाई की हैं। इन दोनों मामलों में करीब 500 किलो गांजा जब्त किया गया है। ताजा कार्रवाई में विशाखापट्टनम से आ रहे दो ट्रकों से 375.95 किलो गांजा बरामद हुआ है। चार लोगों को गिरफ्तार करने के साथ दोनों ट्रकों को भी जब्त किया गया है। इससे पहले 26 अगस्त को रायपुर के पास एक ट्रक से करीब 124 किलो गांजा बरामद किया गया था और एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया था। ष्ठक्रढ्ढ की 9 सितंबर को जारी रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में पिछले दो सप्ताह के दौरान मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ आठ बड़े अभियान चलाए गए। इन कार्रवाइयों में करीब 740 किलो गांजा, उच्च गुणवत्ता वाला हाइड्रोपोनिक गांजा और चरस जब्त किया गया तथा हृष्ठक्कस् एक्ट, 1985 के तहत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस पूरी कार्रवाई में रायपुर से हुई जब्ती सबसे बड़ी बरामदगी में शामिल है।
पुराने धमतरी रोड पर दो ट्रकों को रोका
DRI को खुफिया सूचना मिली थी कि विशाखापट्टनम की ओर से गांजे की बड़ी खेप ट्रकों के माध्यम से लाई जा रही है। सूचना के आधार पर 8 सितंबर को रायपुर के पुराने धमतरी रोड के पास दो ट्रकों को रोका गया। अधिकारियों ने दोनों वाहनों की बारीकी से जांच की। ट्रकों के लोडिंग क्षेत्र में रखी 10 बोरियों पर संदेह होने के बाद उनकी तलाशी ली गई।बोरियों के भीतर कुल 61 पैकेट मिले। फील्ड टेस्ट में पैकेटों में गांजा होने की पुष्टि हुई। इसके बाद कुल 375.95 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया। कार्रवाई में दोनों ट्रकों को भी हृष्ठक्कस् एक्ट के तहत जब्त किया गया है। मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
13 दिन में दूसरी बड़ी कार्रवाई
रायपुर में DRI की यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 26 अगस्त को भी रायपुर के पास एक ट्रक को रोककर करीब 124 किलो गांजा जब्त किया गया था। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। महज करीब दो सप्ताह के भीतर रायपुर क्षेत्र से लगभग 500 किलो गांजा पकड़े जाने से एजेंसियों की निगाह इस रूट पर बढ़ गई है। ष्ठक्रढ्ढ की जांच अब इस बात पर केंद्रित होगी कि गांजे की ये खेप कहां से भेजी गई थी और रायपुर के बाद इन्हें कहां पहुंचाया जाना था। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। ष्ठक्रढ्ढ के अनुसार पिछले दो सप्ताह में देश के अलग-अलग हिस्सों में चलाए गए आठ अभियानों में कुल 709.6 किलो गांजा, 24.5 किलो हाईग्रेड हाइड्रोपोनिक गांजा और पांच किलो चरस जब्त की गई है।
राजधानी के चारों तरफ हर उम्र और हर तबके के लोगों को देख सकते हैं नशे में डूबे
रायपुर को अब महानगरों की तर्ज पर एक नया खिताब मिल गया नशे की राजधानी
नाचने गाने, शराब और धुंए के छल्लों में उड़ रही राजधानी की जवानी!
नशे की राजधानी के रूप में अब रायपुर को महानगरों की तर्ज पर एक नया पहचान मिल गया है नशेडिय़ों के गढ़ रूप में । रायपुर में युवा मदहोशी की आगोश में 24 घंटे झूमते रहते है। राजधानी के हर नुक्कड़, गली और चौराहे पर नशे में अपना बचपन और जवानी दांव पर लगाने वाले युवा हर गली मोहल्लो में मिल जाएंगे । राजधानी के अलावा बाहर से पढऩे लिखने आये युवाओं के बीच तो जैसे अब ये फैशन से हो गया है, कालेज केम्पस से बाहर निकले नहीं कि ये खुले आम लडक़े लड़कियां धुंए के छल्ले उड़ाते नजऱ आने लगते हैं। देखा जाये तो ये एक दूसरे को देखकर या झूठी संतुष्टि के लिए नशे का सेवन करने लगे हैं। राजधानी के चारों तरफ लगभग हर उम्र और हर तबके के लोग नशे में डूब देख सकते हैं, इसमें कोई हैरानी वाली बता नहीं है। लेकिन इसमें भी क्लास के हिसाब से नशे की वैरायटी आ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक अमीर लोग जहां फैशन और आधुनिक होने की दिखावा करने के लिए नशे का सेवन करते हैं तो वहीं गरीब अपनी गरीबी और गलत संगत में पडऩे के वजह से भी नशे के लत में पड जाते हैं। सबसे अधिक तंबाकू और शराब का सेवन करते हैं जिसे आधुनिकता के दौर में थिनर, नशे की गोली, सिरप और इंजैक्शन से बदल लिया गया है। नशे की लत में ही ये लोग अक्सर गलत कामों की तरफ आकर्षित होकर खुद को समाज का दुश्मन बना लेते हैं। सोचने वाली बात है कि राजधानी की सडक़ों पर खुलेआम नशा करने वालों पर रोक-टोक करने वाला भी कोई नहीं है जिसके कई वजह हो सकते है एक तो नशेडिय़ों को समझाइश देना यानी आफत मोल लेने जैसी है , नशे के हालत में यदि वार कर दिया तो जान के लिए खतरा और यदि पुलिस को जानकारी दें तो भी पुलिस वाले ही उनसे मिले हुए होते हैं नशेडिय़ों की जानकारी भी पुलिस दे देती है शिकायत करने वाले की यहाँ भी लेने के देने पड़ जाना है इन सब वजहों से लोग मुँह मोडक़र चुपचाप निकल जाने में ही भलाई समझते हैं।