Raipur. रायपुर। झारखंड के चर्चित गैंगस्टर अमन साहू से जुड़े रायपुर के एक मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। गंज थाना क्षेत्र में दर्ज डकैती की साजिश और रंगदारी से जुड़े मामले में रायपुर की थर्ड एडीजे कोर्ट ने अमन साहू समेत सभी 7 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार 18 अगस्त 2026 को मामले का निपटारा दर्ज किया गया है और केस का स्टेटस कॉन्टेस्टेड-एक्विटेड बताया गया है। इस मामले में अमन साहू के अलावा रोहित स्वर्णकार, मुकेश कुमार, देवेंद्र सिंह, राजबेर सिंह, पप्पू सिंह उर्फ पप्सा और सुनील कुमार उर्फ सुनील कुमार मीणा उर्फ मयंक सिंह आरोपी बनाए गए थे। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ डकैती की योजना बनाने, रंगदारी और आपराधिक षडयंत्र से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था।
मामला रायपुर के गंज थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 223/2024 से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 399, 402, 386 और 120बी के तहत प्रकरण दर्ज किया था। इसके अलावा शुरुआती जांच के दौरान हथियार से जुड़े प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की गई थी। पुलिस की उस समय की जानकारी के अनुसार, मई 2024 में रायपुर पुलिस ने अमन साहू गैंग से जुड़े कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि आरोपी रायपुर में एक बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। जांच में इस पूरी साजिश के तार कथित तौर पर मयंक सिंह से जुड़े बताए गए थे, जिस पर विदेश से गैंग ऑपरेट करने के आरोप लगाए गए थे।
हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अदालत में अपने आरोपों को ठोस रूप से साबित नहीं कर सका। बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपांकार बनर्जी ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों पर डकैती की योजना बनाने और हथियार रखने का आरोप लगाया था, लेकिन ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए। बचाव पक्ष के अनुसार, जिस व्यक्ति को पुलिस ने मयंक सिंह बताकर मामले से जोड़ा था, उसकी पहचान को लेकर भी सवाल उठे। अदालत में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कथित मयंक सिंह वास्तव में वही व्यक्ति था या उसकी पहचान को लेकर कोई भ्रम था।
अधिवक्ता दीपांकार बनर्जी ने बताया कि पुलिस कथित आपराधिक साजिश को प्रमाणित नहीं कर सकी। इसके अलावा हथियार बरामदगी और अन्य साक्ष्यों को भी अदालत के सामने इस स्तर तक साबित नहीं किया जा सका, जिससे आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। हालांकि कोर्ट के विस्तृत आदेश की कॉपी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। आदेश की पूरी जानकारी आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अदालत ने किन साक्ष्यों और कानूनी आधारों पर यह फैसला सुनाया।
इस मामले की शुरुआती जांच में रायपुर पुलिस ने रोहित स्वर्णकार, मुकेश कुमार, देवेंद्र सिंह और पप्पू सिंह उर्फ पप्सा को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि रोहित स्वर्णकार के कब्जे से पिस्टल और मैगजीन बरामद की गई थी। बाद में पुलिस ने मध्यप्रदेश से राजबेर सिंह चावला नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, वह हथियार उपलब्ध कराने से जुड़े मामले में आरोपी बनाया गया था। उस समय जारी पुलिस जानकारी में गंज थाना अपराध क्रमांक 223/24 के साथ आईपीसी की धाराओं और आर्म्स एक्ट का भी उल्लेख किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से कई साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, लेकिन अंतिम रूप से आरोप सिद्ध नहीं हो सके। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। गौरतलब है कि अमन साहू झारखंड का चर्चित गैंगस्टर था और उसके खिलाफ कई राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज थे। मार्च 2025 में झारखंड पुलिस उसे रायपुर से पूछताछ के लिए ले जा रही थी। इसी दौरान पलामू में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी।
उस समय पुलिस का कहना था कि अमन साहू ने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ के दौरान वह मारा गया। अब उसकी मौत के बाद रायपुर के इस मामले में अदालत ने उसे और अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। केस रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले की पहली सुनवाई 9 सितंबर 2024 को हुई थी। बाद में मामला ट्रांसफर होकर रायपुर के 77वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत पहुंचा। सुनवाई पूरी होने के बाद 18 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया गया। फिलहाल अदालत की वेबसाइट पर फैसले की विस्तृत कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में कोर्ट के अंतिम आदेश में बताए गए कारणों और साक्ष्यों की पूरी जानकारी ऑर्डर कॉपी जारी होने के बाद ही सामने आएगी।