Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धर्मगुरु परम आलय द्वारा दिए गए बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “शादी से पहले सेक्स पर किसी को एतराज़ नहीं होना चाहिए। जैसे गाड़ी बिना सीखे नहीं चलाई जा सकती, वैसे ही बिना सेक्स किए शादी करना भी ठीक नहीं है।” उनके इस बयान ने धार्मिक और सामाजिक दायरों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दे दिया है। परम आलय का कहना था कि आधुनिक समय में युवा पीढ़ी रिश्तों को समझना चाहती है, और अगर दो लोग पारस्परिक सहमति से किसी रिश्ते में कदम रखते हैं, तो समाज को इसे लेकर रूढ़िवादी रवैया नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “शादी एक बड़ा निर्णय है, और यदि दो लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर जाने से पहले एक-दूसरे को समझना चाहते हैं, तो इसमें गलत क्या है?”
हालांकि उनके समर्थन में कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि आज के समाज में रिश्तों की खुली चर्चा जरूरी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक संगठनों, सामाजिक समूहों और कई पारिवारिक संस्थाओं ने धर्मगुरु के बयान को “अशोभनीय, भ्रामक और भारतीय संस्कृति के विपरीत” कहा है। कई संगठनों ने इसे युवाओं को गलत दिशा में ले जाने वाला बयान बताते हुए इसकी निंदा की है। विरोधियों का कहना है कि एक धर्मगुरु से ऐसे बयानों की उम्मीद नहीं की जाती, खासकर ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर, जो समाज में नैतिकता और अनुशासन से जुड़े हैं। कुछ लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि परम आलय इस बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ यूज़र्स इसे प्रगतिशील सोच बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे अनावश्यक विवाद और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाला बता रहे हैं। फिलहाल धर्मगुरु परम आलय की ओर से उनके बयान पर किसी प्रकार का स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, लेकिन बढ़ती प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह मामला और गर्माने की आशंका है।