मंत्री ओपी चौधरी से मिला रियल एस्टेट ब्रोकर प्रतिनिधिमंडल, समाधान का आश्वासन

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Update: 2025-12-06 13:10 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट सेक्टर में हाल ही में रजिस्ट्री पंजीयन दरों में की गई भारी वृद्धि के विरोध में छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट ब्रोकर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार के समक्ष अपनी गंभीर आपत्तियां रखी हैं। संगठन के अध्यक्ष महेश आर्य के नेतृत्व में ब्रोकरों का प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को माननीय मंत्री ओपी चौधरी से मिला और प्रदेश के कई क्षेत्रों में 500 से 900 प्रतिशत तक बढ़ाई गई रजिस्ट्री पंजीयन दरों को अव्यवहारिक और जनविरोधी बताया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस विसंगति से रियल एस्टेट कारोबार
प्रभावित
हो रहा है, साथ ही आम जनता पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बैठक के दौरान अध्यक्ष महेश आर्य ने विस्तार से बताया कि मध्य प्रदेश के बड़े शहर भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर जहां विकास की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है, वहां रजिस्ट्री पंजीयन दरों में केवल 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ के अभनपुर तहसील के ग्राम बेंद्री और निमोरा जैसे क्षेत्रों में भारी विकास को देखते हुए पंजीयन दरों में 500 से 700 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई है, जो किसी भी मानक के अनुसार तर्कसंगत नहीं है।

इसी तरह, प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई, पुणे और नासिक का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के इन अत्यंत विकसित एवं महंगे रियल एस्टेट बाजारों में भी इस वर्ष रजिस्ट्री पंजीयन दरों में केवल 4 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ के गोबरा नवापारा तहसील के गांवों में विकास और उन्नति को आधार बनाकर 700 से 900 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई, जिससे क्षेत्र के ब्रोकरों, निवेशकों और आम खरीदारों में भारी नाराजगी है। ब्रोकर्स एसोसिएशन ने मंत्री के सामने यह भी मुद्दा उठाया कि छत्तीसगढ़ एक नक्सल प्रभावित राज्य है, जहां भू-अधिग्रहण, भूमि की उपलब्धता और विकास कार्य कई बाधाओं के कारण प्रभावित होते हैं। ऐसे में कुछ चुनिंदा उदाहरणों के आधार पर पूरे प्रदेश में पंजीयन दरों में भारी वृद्धि करना व्यावहारिक नहीं है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राज्य की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप न्यायसंगत रजिस्ट्री पंजीयन दरें तय की जानी चाहिए।

आरडीए की देरी और लंबित आवंटन पर भी नाराजगी
बैठक के दौरान ब्रोकर्स एसोसिएशन ने रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दों को भी विस्तार से रखा। पहला, वर्ष 2017 में आरडीए द्वारा बोरिया खुर्द (कमल विहार के समीप) क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग, अनुसूचित जनजाति और थर्ड जेंडर सहित 200 गरीब परिवारों को स्वतंत्र मकान आवंटित किए गए थे। इन सभी लाभार्थियों ने अपने-अपने मकानों की सभी किस्तें चुका दी हैं और बैंक ब्याज भी चुकता कर रहे हैं। इसके बावजूद, 8 वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी न उन्हें मकानों का पोज़ेशन मिला है, न ही लेटर जारी किए गए हैं। लोग लगातार आरडीए के चक्कर काट रहे हैं और अपने सपनों का घर पाने के लिए भटक रहे हैं। दूसरा मुद्दा हाल ही में आरडीए द्वारा ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत कमल विहार और कौशल्या माता बिहार में 150 फ्लैटों के आवंटन से जुड़ा है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर ली गई है और पात्र लाभार्थियों ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं, किंतु पिछले एक महीने से आवंटन की कोई घोषणा नहीं हुई है। इससे आवेदकों में असमंजस और चिंता बढ़ रही है।

मंत्री ने दिया समाधान का आश्वासन
ब्रोकर्स एसोसिएशन की बात सुनने के बाद मंत्री ओपी चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और रजिस्ट्री पंजीयन दरों पर जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आरडीए से संबंधित लंबित मामलों पर भी त्वरित कार्रवाई के निर्देश देने का भरोसा दिलाया। एसोसिएशन ने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार जल्द निर्णय लेकर सामान्य जनता, ब्रोकर समुदाय और रियल एस्टेट क्षेत्र को राहत प्रदान करेगी। रियल एस्टेट कारोबारियों का मानना है कि यदि पंजीयन दरों में तार्किक ढंग से संशोधन नहीं किया गया, तो प्रदेश में संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे राजस्व के साथ-साथ रोजगार पर भी विपरीत असर पड़ेगा। यह मुद्दा फिलहाल चर्चा में है और राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े विभिन्न वर्ग सरकार के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।
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