पंडरी में शासकीय जमीन की फर्जी रजिस्ट्री
शहर के रसूखदार बाहरी व्यापारियों ने मिलकर छत्तीसगढ़ सरकार की सरकारी भूमि को हड़पा
बिना वैध दस्तावेज नामांतरण दस रजिस्ट्रियां हुई, बड़े फर्जीवाड़े की आशंका, होगा जांच से खुलासा
शासकीय भूमि में अवैध तरीके से रजिस्ट्री की शिकायत उच्चस्तरीय
आज तक आनलाइन में दर्ज 197/3 भूमि शासकीय खाते में दर्ज
भूमि का बटांकन नहीं, आबंटन भी नहीं सरकार का आदेश भी नहीं तो कैसे हुई रजिस्ट्री
197/3 एक मात्र पूरा खसरा चालाकी अलग अलग खसरे की भूमि के साथ मिलाकर रजिस्ट्री की गई
तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार सीधे तौर पर भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत कर शासकीय भूमि का कारनामा कर दिखाया
रायपुर (जसेरि)। राजधानी के पंडरीतराई स्थित सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराकर बेचने का गंभीर प्रकरण सामने आया है। पंडरी तराई स्थित खसरा नंबर भूमि 197/3 राजस्व अभिलेख में शासकीय भूमि दर्ज है लेकिन इसे पंजीयक विभाग से मिलीभगत कर फर्जी रजिस्ट्री करवा कर कुछ लोगों ने अपने नाम दर्ज करा लिया है। इसकी शिकायत कलेक्टर, एसडीएम, रजिस्ट्रार कर जांच की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार पंडरी तराई रायपुर में भूमि खसरा नंबर 197/3 राजस्व अभिलेख में शासकीय भूमि दर्ज है जिसे रमेश कुमार, विरेन्द्र गोयल, रमेश गोयल, संजय गोयल ने पंजीयन अधिकारियों से सांठगांठ कर अपने नाम रजिस्ट्री करा ली है। जबकि इस भूमि का बटांकन भी नहीं हुआ है इसके बावजूद उक्त भूमि की रजिस्ट्री कर उपरोक्त लोगों के नाम पर नामांतरण भी कर दिया गया। जबकि आरआई के प्रतिवेदन में भी उक्त भूमि शासकीय भूमि बताया गया है। इससे प्रकरण में साफ पता चलता है कि शासकीय भूमि की फर्जी रजिस्ट्री व नामांतरण कर बड़े पैमाने पर स्टा प ड्यूटी की चोरी कर राज्य सरकार को नुकसान पहुंचाया गया है।
शिकायत के अनुसार प्रकरण से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ग्राम पंडरीतराई स्थित खसरा नंबर 197/3 शासकीय भूमि की रजिस्ट्री विक्रेता रमेश कुमार वल्द बृजलाल सोनार ने क्रेता विरेन्द्र गोयल, रमेश गोयल तथा संजय गोयल, संचालक गोयल वनस्पति प्रोडक्टस लिमिटेड के पक्ष में दिनांक 21/10/1992 को 7750 वर्ग फुट, दिनांक 23/10/1992 को 6000 वर्ग फुट दिनांक 29/10/1993 को 1500 वर्ग फुट तथा दिनांक 11/11/2005 को 250 वर्ग फुट भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई। फिर उस जमीन की रजिस्ट्री किए बिना ही श्री नाकोड़ा इंडस्ट्रीज प्रायवेट लिमिटेड में दिनांक 06/03/2023 को भगवती पावर एंड स्टील लिमिटेड को 2937 वर्ग फुट दिनांक 31/10 2023 को श्रीमती बंटी अग्रवाल के नाम पर 3026 वर्ग फुट दिनांक 08/11/2023 को बालकिशन स्टील प्राइवेट लिमिटेड को 2937 वर्ग फुट दिनांक 29/12/2023 को श्रीमती बंटी अग्रवाल के नाम पर 2244 वर्ग फुट दिनांक 02/01/2024 को भगवती पावर एंड स्टील लिमिटड के नाम पर 2178 वर्ग फुट तथा दिनांक 08/01/2024 को बालकिशन स्टील प्राइवेट लिमिटड के नाम पर शासकीय भूमि खसरा नंबर 197/3 की रजिस्ट्री की गई है।
राजस्व प्रकरणों में किसी फर्म का नाम परिवर्तन तथा जमीन का भूमि स्वामी बनना दोनों अलग-अलग बातें हैं। फर्म का नाम परिवर्तन करने का अधिकार कंपनी रजिस्ट्रार को हो सकता है लेकिन किसी अजल संपत्ति के स्वामित्व का हस्तांतरण करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। बावजूद उक्त भूमि की दस रजिस्ट्रियां कैसे हो गई यह जांच का विषय है। शिकायत कर्ता ने इस प्रकरण में बड़ी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए उक्त सभी रजिस्ट्रयों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
दस्तावेजी अपराध हमेशा अपराध माना गया चाहे बरसों बाद भी उजागर हो
शासकीय भूमि पंडरी स्थित 197/3 खसरा सिंगल खसरा किसी प्रकार का बंटांकन नहीं किया जा सकता। न ही शसकीय भूमि को बिना भू आबंटन या निलामी के अलावा किसी प्रकार के खसरे में पटवारी से लेकर कलेक्टर तक को ये अधिकार नहीं है शासकीय अभिलेख में दर्ज 197/3 भूमि जो आय पर्यंत तक आनलाईन भुईंया सरकारी पोर्टल में स्पष्ट रूप से शासकीय भूमि के नाम पर दर्ज है। भूमाफियाओं ने धीरे-धीरे 30 करोड़ से ज्यादा की शासकीय जमीन फर्जी तरीका अपनाकर रजिस्ट्री कराई है जिसकी शिकायत कलेक्टर रजिस्ट्रार और पुलिस में दी गई है। उपरोक्त दस्तावेज में पटवारी और अधिकारियों की मिलीभगत प्रतिवेदन से साफ झलकता है। शासकीय भूमि चोरी हुई है। अब संबंधित विभाग के द्वारा जांच के उपरांत भू माफिया और अधिकारी पटवारी की पोल खुलेगी और सच्चाई सामने आईयेगी। बहुत जल्द आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।