Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के कोटा क्षेत्र में रहने वाले एक व्यापारी ने भोपाल निवासी कारोबारी पर 75 लाख रुपये की ठगी, धोखाधड़ी और विश्वास भंग का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस संबंध में पुलिस आयुक्त रायपुर और थाना सरस्वती नगर में लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ता अमृत लाल बिलथरे, पिता स्व. राजाराम बिलथरे, निवासी लक्ष्मीनारायण मंदिर रोड कोटा रायपुर, खाद्य पदार्थों के क्रय-विक्रय और कमीशन व्यवसाय से जुड़े हैं। वे “सात्विक एग्रो फूड प्रोडक्ट्स” नाम से व्यापार संचालित करते हैं। आवेदन में उन्होंने बताया कि उनके पड़ोसी दिनेश मिश्रा ने उनकी मुलाकात भोपाल निवासी सैय्यद इरशाद पिता सैय्यद रशीद, निवासी मकान नंबर 186/4 अशोका गार्डन, अशोक विहार भोपाल (मध्यप्रदेश) से कराई थी।
पीड़ित के अनुसार सैय्यद इरशाद ने स्वयं को खाद्य पदार्थों और फलों का बड़ा व्यापारी बताते हुए अपने व्यापार में निवेश करने का प्रस्ताव दिया। उसने भरोसा दिलाया कि निवेश की गई राशि पर अच्छा मुनाफा मिलेगा। अमृत लाल बिलथरे का कहना है कि वे पहले से खाद्य व्यापार में होने के कारण लाभ-हानि की प्रकृति से परिचित थे और आरोपी की बातों में आ गए। शिकायत के मुताबिक जुलाई 2022 से लेकर वर्ष 2026 तक अलग-अलग किश्तों में नगद और फर्म के बैंक खाते से लगभग 75 लाख रुपये सैय्यद इरशाद को दिए गए। आरोप है कि निवेश के बाद न तो कोई मुनाफा मिला और न ही मूल राशि वापस की गई। जब भी पैसे की मांग की जाती, आरोपी आश्वासन देता कि व्यापार में अच्छा लाभ हो रहा है और पूरी रकम एकमुश्त मुनाफे सहित लौटा दी जाएगी।
पीड़ित का आरोप है कि समय बीतने के साथ आरोपी टालमटोल करने लगा और बाद में फोन उठाना भी बंद कर दिया। दबाव बनाने पर उसने 31 लाख रुपये का एक चेक दिया, लेकिन संबंधित बैंक खाता पहले से बंद था। बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक खाता बंद होने के कारण बाउंस हो गया। अमृत लाल बिलथरे का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई है। झूठे वादों के जरिए विश्वास में लेकर उनसे निवेश कराया गया और फिर रकम हड़प ली गई। उन्होंने अपने आवेदन में खुद को ठगा हुआ और प्रताड़ित महसूस करने की बात कही है तथा आरोपी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले में आवेदन पुलिस आयुक्त कार्यालय रायपुर और थाना सरस्वती नगर में 27 फरवरी 2026 को प्रस्तुत किया गया है। फिलहाल पुलिस द्वारा आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि की गई है और मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। आर्थिक अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच यह प्रकरण व्यापारिक निवेश के नाम पर की जाने वाली ठगी का एक और उदाहरण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जांच के बाद पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।