Raipur Breaking: परदेशिया वीरेंद्र तोमर को मिली 4 दिन की पुलिस रिमांड
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Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के चर्चित और कुख्यात सूदखोर वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी को पुलिस ने 8 नवंबर को मध्यप्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को रायपुर लाकर 9 नवंबर को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भाठागांव इलाके से लेकर स्पेशल कोर्ट तक जुलूस निकालते हुए पेश किया गया था। कोर्ट ने उस समय पुलिस की मांग पर उसे 24 घंटे की रिमांड पर भेजा था। अब रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद 10 नवंबर को पुलिस ने एक बार फिर वीरेंद्र तोमर को अदालत में पेश किया। पेशी के दौरान पुलिस ने न्यायालय से आगे की जांच के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी से पूछताछ में कई नए पहलू सामने आए हैं और अभी भी उसके सूदखोरी नेटवर्क, अवैध वसूली के तरीकों तथा उसके सहयोगियों की पहचान को लेकर कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की अर्जी स्वीकार कर ली और वीरेंद्र तोमर को 4 दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब आरोपी को 14 नवंबर को फिर से न्यायालय में पेश किया जाएगा।
सूदखोरी के जाल में फंसे सैकड़ों लोग
पुलिस के अनुसार, वीरेंद्र सिंह तोमर लंबे समय से रायपुर और आसपास के इलाकों में सूदखोरी का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। वह ज़रूरतमंद लोगों को ऊंचे ब्याज पर पैसा उधार देता था और फिर गुंडागर्दी के बल पर वसूली करता था। कई पीड़ितों ने पुलिस को बताया है कि तोमर और उसके गुर्गे मारपीट, धमकी और संपत्ति कब्जे जैसी गतिविधियों में शामिल थे। पुलिस को जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि रूबी तोमर “विस्टों फाइनेंस” नामक एक फाइनेंस ग्रुप के नाम से यह नेटवर्क चलाता था। यह संस्था कागज़ों पर वैध दिखती थी, लेकिन हकीकत में यह अवैध वसूली का माध्यम थी। पुलिस को उसके ठिकानों से करोड़ों रुपये के लेन-देन के दस्तावेज, रजिस्टर और खाताबही मिले हैं, जिनसे कई अन्य व्यक्तियों और कारोबारियों की संलिप्तता का खुलासा होने की संभावना है।
घर से बरामद हुए हथियार और दस्तावेज़
गिरफ्तारी से पहले की गई तलाशी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने वीरेंद्र तोमर के घर और ऑफिस से कई अवैध हथियार, कारतूस और करोड़ों रुपये की उगाही से संबंधित दस्तावेज़ जब्त किए थे। तेलीबांधा थाना और पुरानी बस्ती थाना में उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं, जिनमें मारपीट, धमकी, अवैध संपत्ति अर्जन और आर्म्स एक्ट के तहत अपराध शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रूबी तोमर रायपुर के कई इलाकों में जमीन कारोबार में भी घुसा हुआ था और उसने सूदखोरी के पैसे को रियल एस्टेट में निवेश कर रखा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन किन लोगों ने उसके नेटवर्क से पैसा लिया या निवेश किया और किन लोगों ने उससे साझेदारी की।
लंबे समय से फरार चल रहा था आरोपी
रायपुर पुलिस ने बताया कि वीरेंद्र तोमर और उसका सहयोगी रोहित सिंह तोमर जून 2025 से फरार थे। पुलिस ने इन दोनों को पकड़ने के लिए छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा और मध्यप्रदेश में लगातार छापेमारी की थी। आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी नहीं कर रहा था, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन ट्रैक करने में काफी मुश्किलें आ रही थीं। आखिरकार, रायपुर पुलिस की एक विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्वालियर में रूबी तोमर को ट्रैक किया और कई दिनों तक रेकी करने के बाद उसे गिरफ्तार करने में सफलता पाई। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके ठिकाने से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और डिजिटल डेटा भी बरामद किए, जिनकी जांच साइबर टीम कर रही है।
भाठागांव में सुरक्षा के बीच जुलूस
9 नवंबर को जब पुलिस वीरेंद्र तोमर को ग्वालियर से रायपुर लाई, तो सुरक्षा कारणों से पूरे भाठागांव इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने आरोपी को इलाके में लेकर जुलूस निकाला ताकि जनता को यह संदेश दिया जा सके कि सूदखोरी जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर मौजूद थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह जुलूस केवल सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि समाज में विश्वास बहाली का एक प्रतीकात्मक कदम था। पुलिस का मकसद था कि लोगों को यह भरोसा दिलाया जाए कि शहर में किसी को भी सूदखोरी और अवैध उगाही का डर नहीं होना चाहिए।
अगली पेशी 14 नवंबर को
अब आरोपी वीरेंद्र तोमर को चार दिन की रिमांड के बाद 14 नवंबर को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान रूबी तोमर से उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, उसके निवेशकों और अवैध कमाई के ठिकानों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। इस बीच पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या रूबी तोमर के तार राज्य से बाहर के सूदखोर गिरोहों या किसी संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़े हैं। यदि ऐसा पाया गया, तो जांच का दायरा अन्य राज्यों तक बढ़ाया जा सकता है। रायपुर पुलिस ने कहा है कि सूदखोरी और अवैध वसूली जैसे अपराधों पर नकेल कसने के लिए अभियान जारी रहेगा। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है।