PG कोटे में कटौती का विरोध: छत्तीसगढ़ के MBBS छात्रों का काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन

छग

Update: 2025-12-08 17:06 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में मेडिकल PG सीटों के कोटे में बड़े बदलाव के खिलाफ सोमवार को राज्यभर के MBBS छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। रायपुर स्थित डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में भारी संख्या में मेडिकल छात्र एकत्र हुए और काली पट्‌टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। छात्रों ने हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते हुए कहा कि नए नियम उनके करियर के लिए बेहद नुकसानदेह हैं और इससे राज्य के मेडिकल छात्रों के लिए PG में प्रवेश पाना मुश्किल हो जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अनुसार, वर्तमान में देशभर में मेडिकल PG सीटों का ढांचा इस प्रकार है–
50% सीटें अखिल भारतीय कोटे (All India Quota–AIQ) में जाती हैं।
50% सीटें राज्यों के कोटे (State Quota) के लिए रहती हैं, जिन्हें प्राथमिकता से उस राज्य के मेडिकल कॉलेजों के MBBS छात्रों को आवंटित किया जाता है।
परंतु हाल ही में लागू किए गए नए निर्णय में राज्य कोटे में भारी कटौती की गई है। फेडरेशन का कहना है कि—
राज्य कोटा 50% से घटाकर 25% कर दिया गया है।
केंद्रीय (AIQ) कोटा 50% से बढ़ाकर 75% कर दिया गया है।
इस बदलाव के कारण छत्तीसगढ़ के MBBS छात्रों के लिए स्थानीय PG सीटों पर अधिकार कम हो गया है। डॉक्टर्स फेडरेशन ने इसे छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए तुरंत निर्णय वापस लेने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि छत्तीसगढ़ में हर साल हजारों छात्र MBBS पूरा करते हैं, जिनमें से अधिकतर अपने ही राज्य में PG करना चाहते हैं, पर नए नियमों से उनके भविष्य पर सीधा असर पड़ेगा।
छात्रों का दर्द: “हम पीजी के हक से वंचित होंगे”
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि उन्होंने सालों मेहनत कर के MBBS पूरा किया और उम्मीद की कि राज्य कोटे में उपलब्ध सीटों के आधार पर उन्हें PG करने का अवसर मिलेगा। लेकिन अब केंद्र कोटा बढ़ने से स्थानीय छात्रों की प्राथमिकता कम हो गई है।
एक छात्र नेता ने कहा
“देश के किसी भी राज्य में ऐसा नियम नहीं है कि राज्य कोटा सिर्फ 25% हो। यह फैसला छत्तीसगढ़ के छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने भी छात्रों के साथ खड़े होते हुए नए नियमों का खुलकर विरोध किया। PCC अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि “देश के किसी भी राज्य में ऐसा मॉडल लागू नहीं है। राज्य का कोटा कम करना लोकल छात्रों के अधिकारों पर सीधा हमला है।” कांग्रेस ने राज्य सरकार से यह निर्णय वापस लेने की मांग की है और कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है। PG सीटों की संख्या सीमित होने के कारण इस विवाद का प्रभाव व्यापक है। डॉक्टरों और छात्रों का मानना है कि अगर राज्य सरकार इसे तुरंत रद्द नहीं करती, तो छत्तीसगढ़ के युवाओं को अन्य राज्यों में जाकर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी, जिससे उनकी कठिनाई कई गुना बढ़ जाएगी। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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