“प्रोजेक्ट आओ बांटे खुशियां” से बच्चों के चेहरों पर मुस्कान

छग

Update: 2025-11-13 15:00 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी कर्मचारी अब अपने जन्मदिन को केवल व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि सेवा और सामाजिक सरोकार का अवसर बना रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप जिले में शुरू की गई पहल “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” अब लगातार सकारात्मक उदाहरण पेश कर रही है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य है- समाज के वंचित वर्गों तक खुशियाँ पहुँचाना, बच्चों के जीवन में मुस्कान लाना, और सरकारी कर्मचारियों को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना। मुख्यमंत्री के निर्देश पर “प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना” और “न्योता भोज” कार्यक्रम के साथ इस परियोजना को जोड़ा गया है। इसके तहत जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी का जन्मदिन केवल एक औपचारिक अवसर न होकर समाजसेवा और बच्चों के साथ खुशियाँ बाँटने का दिन बने।

इसी क्रम में आज महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक ऋतु परिहार ने अपना जन्मदिन आंगनबाड़ी केंद्र भानसोज के बच्चों के साथ मनाकर “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” को सार्थक रूप दिया। उन्होंने बच्चों के साथ केक काटा, उन्हें फल, पौष्टिक आहार और उपहार वितरित किए। इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएँ और स्थानीय महिलाएँ भी मौजूद थीं। कार्यक्रम में बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था। ऋतु परिहार ने कहा, “जीवन का सबसे बड़ा सुख तब मिलता है जब हम अपनी खुशियाँ दूसरों के साथ साझा करते हैं। इन बच्चों की मुस्कान ही मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार है।” उन्होंने बताया कि “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” जैसी पहल न केवल सामाजिक सद्भाव को बढ़ा रही है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों में भी सेवा भावना और संवेदनशीलता का भाव मजबूत कर रही है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिलेभर में अब तक दर्जनों सरकारी कर्मचारी इस पहल से जुड़ चुके हैं। जन्मदिन, वर्षगाँठ या किसी विशेष अवसर पर वे आंगनबाड़ी, आश्रय गृह, या वृद्धाश्रमों में जाकर भोजन वितरण, पौधारोपण, शिक्षण सामग्री वितरण जैसे कार्य कर रहे हैं। इससे सरकारी सेवा और समाज के बीच एक नई सकारात्मक कड़ी जुड़ रही है। प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर सरकारी कर्मचारी कम से कम एक दिन समाज के जरूरतमंद लोगों के बीच बिताए। इससे शासन की नीतियाँ जनसरोकार के स्तर पर और अधिक संवेदनशील बन सकेंगी। भानसोज आंगनबाड़ी केंद्र में हुए इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि खुशियाँ बाँटने से बढ़कर कोई उत्सव नहीं होता। जब सरकारी कर्मचारी अपने पद और कर्तव्यों से आगे बढ़कर समाज के सबसे निचले तबके तक मुस्कान पहुँचाते हैं, तो प्रशासनिक व्यवस्था का चेहरा और मानवीय बनता है।
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