डीजल चोरी के शक में पोकलेन चालक की बंद कमरे में बंधक बनाकर पिटाई

छग

Update: 2025-11-06 19:03 GMT
Balrampur/Rajpur. बलरामपुर/राजपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां डीजल चोरी के संदेह में एक पोकलेन चालक को बंद कमरे में बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आ गई है। मामला बरियों पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भिलाई गांव का है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम भिलाई में सिंघल नामक क्रेशर प्लांट संचालित है। यहां पोकलेन मशीन चलाने का कार्य ग्राम बघिमा निवासी विनोद सार्थी कर रहा था। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले क्रेशर संचालक को डीजल की चोरी होने का शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपने स्टाफ पर निगरानी बढ़ा दी थी। इसी बीच शनिवार रात को पोकलेन चालक विनोद सार्थी और उसके एक सहयोगी पर चोरी का आरोप लगाते हुए क्रेशर प्रबंधन ने उन्हें पकड़ा और बंद कमरे में बंधक बना लिया।

आरोप है कि क्रेशर संचालक दीपक अग्रवाल (निवासी कुंडला सिटी, अंबिकापुर) और उनके सहयोगियों ने दोनों युवकों के हाथ-पैर बांध दिए और बारी-बारी से लाठी-डंडों से उनकी जमकर पिटाई की। बताया जा रहा है कि घटना के दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने पिटाई का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक जमीन पर गिरा हुआ है और दो से तीन लोग उसे बुरी तरह पीट रहे हैं। पीड़ित युवक बार-बार छोड़ने की गुहार लगा रहा है, लेकिन आरोपी लगातार उसकी पिटाई करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही बरियों पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। वहीं, घायल पोकलेन चालक को उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वीडियो की जांच कराई जा रही है और इसमें शामिल आरोपियों की पहचान की जा रही है। अगर वीडियो की सत्यता की पुष्टि होती है, तो आरोपियों के खिलाफ बंधक बनाकर मारपीट करने और मानवाधिकारों के उल्लंघन के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह का अमानवीय व्यवहार अस्वीकार्य है। किसी पर चोरी का शक होने पर पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए थी, न कि कानून को हाथ में लिया जाए। वहीं, पीड़ित परिवार ने क्रेशर संचालक और उसके साथियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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