पेपर लीक कांड: राजस्व निरीक्षक परीक्षा मामले में 3000 पृष्ठों का प्रथम चालान पेश
छग
Raipur. रायपुर। राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 के बहुचर्चित पेपर लीक मामले में जांच एजेंसी ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए न्यायालय में 3000 पृष्ठों का प्रथम चालान प्रस्तुत किया है। यह चालान राज्य की प्रमुख जांच संस्था Economic Offences Wing & Anti Corruption Bureau Chhattisgarh द्वारा दाखिल किया गया। प्रकरण में सहायक सांख्यिकी अधिकारी Virendra Jatav और सहायक सांख्यिकी अधिकारी Hemant Kumar Kaushik को आरोपी बनाया गया है। एसीबी-ईओडब्ल्यू में दर्ज अपराध क्रमांक 64/2025 के तहत आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी) के अंतर्गत मामला कायम किया गया है। जांच में सामने आया कि राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित होनी थी, लेकिन परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी विरेंद्र जाटव ने वरिष्ठ अधिकारी के आवास पर प्रश्नपत्र टाइप किया था। इसी दौरान प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग हुई और परीक्षा शुरू होने से पहले चुनिंदा अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाया गया। आरोप है कि आरोपियों ने अभ्यर्थियों से रकम लेकर प्रश्नपत्र की प्रतियां उपलब्ध करवाईं। अब तक की विवेचना में यह पुष्टि हुई है कि 100 से अधिक अभ्यर्थियों को लीक प्रश्नपत्र मिला था। डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जांच ने मामले को और मजबूत किया है। विवेचना के दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और संचार माध्यमों से यह स्पष्ट हुआ कि प्रश्नपत्र विभिन्न माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। एजेंसी को ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि प्रश्न सामग्री साझा करने के बदले आरोपियों ने आर्थिक लाभ प्राप्त किया।
जांच में एक संगठित नेटवर्क के संकेत भी मिले हैं। पाया गया कि अलग-अलग जिलों से आए कुछ अभ्यर्थी समूह में परीक्षा देने पहुंचे थे। आरोपियों द्वारा इन अभ्यर्थियों को अलग-अलग होटलों में ठहरने के निर्देश दिए गए। संबंधित स्थानों पर पहुंचकर प्रश्न उपलब्ध कराए गए और अभ्यर्थियों को प्रश्न पढ़कर नोट कराने की प्रक्रिया अपनाई गई। साक्ष्य नष्ट करने के उद्देश्य से परीक्षा से पूर्व लिखे गए प्रश्नों को जलाने के निर्देश भी दिए गए। एसीबी-ईओडब्ल्यू की जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि इस कार्य में आरोपियों के रिश्तेदारों का उपयोग किया गया। ये व्यक्ति विभिन्न होटलों में जाकर अभ्यर्थियों को प्रश्न नोट कराने की प्रक्रिया में शामिल रहे। इससे संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र लीक की योजना सुनियोजित ढंग से क्रियान्वित की गई।
तकनीकी विश्लेषण, विशेष रूप से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के अध्ययन में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। परीक्षा से ठीक पूर्व की रात कई अभ्यर्थियों और आरोपियों की लोकेशन एक समान पाई गई। टावर लोकेशन डेटा से यह भी संकेत मिला कि आरोपी परीक्षा से पहले अलग-अलग होटलों, फार्म हाउस और रिसॉर्ट्स में आवाजाही कर रहे थे, जहां अभ्यर्थी ठहरे हुए थे। जांच एजेंसी ने परीक्षा परिणामों का भी विश्लेषण किया। जिन अभ्यर्थियों के एक साथ ठहरने के प्रमाण मिले, उनके अंकों और उत्तर-पुस्तिकाओं में उल्लेखनीय समानता पाई गई। सही और गलत उत्तरों के पैटर्न में समानता ने संदेह को और बल दिया, जिससे लीक प्रश्नपत्र के प्रभाव की पुष्टि होती है। फिलहाल, प्रकरण में वित्तीय लेनदेन यानी मनी ट्रेल सहित अन्य संभावित संलिप्त अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों और व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत आगे की विवेचना की जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि जैसे-जैसे नए साक्ष्य सामने आएंगे, अतिरिक्त चालान भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं।