NDPS विवेचना पर ऑनलाइन कार्यशाला, पुलिस अधिकारियों को दी गई ट्रेनिंग

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Update: 2026-04-21 18:37 GMT
Raigarh. रायगढ़। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग की पहल पर NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) मामलों की विवेचना की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से एक दिवसीय रेंज स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पुलिस महानिरीक्षक मीटिंग हॉल से आयोजित की गई, जिसमें रेंज के विभिन्न जिलों से लगभग 100 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग द्वारा किया गया।
उन्होंने कहा कि NDPS मामलों की जांच के दौरान छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियां भी पूरे प्रकरण को कमजोर कर देती हैं, जिससे आरोपी को न्यायालय से लाभ मिल जाता है। उन्होंने विवेचकों को आधुनिक चुनौतियों के अनुसार जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के निर्देश दिए। इस कार्यशाला में सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक अभियोजन (बिलासपुर संभाग) माखनलाल पाण्डेय ने विशेष रूप से NDPS एक्ट की विवेचना से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान धारा 42, 50 और 57 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है।
क्योंकि किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक से पूरा मामला कमजोर हो सकता है। उन्होंने धारा 52 के तहत जब्त मादक पदार्थों के मजिस्ट्रेट के समक्ष सत्यापन, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी को आवश्यक बताया। साथ ही नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (जप्ती, भंडारण, नमूनाकरण और निपटान) नियम 2022 के अनुसार सैंपलिंग प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि विवेचना केवल जब्ती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मादक पदार्थ के स्रोत से लेकर उसके अंतिम गंतव्य तक की पूरी श्रृंखला को जोड़ना जरूरी है, ताकि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने दस्तावेजीकरण, पंचनामा, जप्ती मेमो और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों और आधुनिक तकनीक के उपयोग को जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने का अहम माध्यम बताया गया।
कार्यशाला के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों ने अपने व्यावहारिक अनुभव और समस्याएं साझा कीं। विशेषज्ञों ने उनके समाधान भी बताए। पुलिस महानिरीक्षक श्री गर्ग ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्य विवेचना में होने वाली त्रुटियों को कम करना और न्यायालय में मजबूत केस प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि जांच को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाना समय की आवश्यकता है। कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए सेवानिवृत्त अभियोजन अधिकारी माखनलाल पाण्डेय को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा द्वारा किया गया। यह कार्यशाला NDPS मामलों की जांच को और अधिक प्रभावी, तकनीकी रूप से मजबूत और न्यायिक रूप से सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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