रायपुर में नक्सल दंपत्ति के शहरी नेटवर्क बनाने की साजिश नाकाम, सोने का बिस्कुट और नकदी बरामद

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Update: 2025-09-26 14:11 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने माओवादी संगठन के शहरी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। मुखबिर से मिली गुप्त सूचना पर की गई कार्रवाई में पुलिस ने 24 सितंबर 2025 को चंगोराभाठा इलाके से एक महिला और एक पुरुष को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने खुद को माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ स्वीकार किया और राजधानी में रहकर नक्सली संगठन के लिए काम करने की बात कबूल की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जग्गू कुरसम उर्फ रवि उर्फ रमेश (28 वर्ष) निवासी ग्राम सावनार, थाना गंगालुर, जिला बीजापुर और उसकी पत्नी कमला कुरसम (27 वर्ष) निवासी ग्राम सावनार, थाना गंगालुर, जिला बीजापुर के रूप में हुई है।
शहरी नेटवर्क बनाने का काम कर रहे थे
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पिछले कुछ समय से रायपुर में रहकर नक्सली संगठन के लिए सक्रिय थे। इनका मुख्य कार्य शहर में रसद उपलब्ध कराना, बीमार माओवादियों का इलाज कराना, बड़े कॉडरों को आश्रय स्थल उपलब्ध कराना और शहरी नेटवर्क का विस्तार करना था। यह नेटवर्क माओवादियों को शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित ठिकाना दिलाने और आर्थिक संसाधन जुटाने का काम करता है।



बरामदगी में सोने का बिस्कुट और नकदी
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक सामग्री जब्त की। इसमें दो मोबाइल फोन, 10 तोला का सोने का बिस्कुट, 1 लाख 14 हजार 240 रुपये नकद और अन्य सामान शामिल है। पुलिस का मानना है कि यह राशि माओवादी गतिविधियों और संगठन की आर्थिक जरूरतों के लिए एकत्रित की गई थी।
मामला दर्ज और विशेष न्यायालय में पेशी
दोनों आरोपियों के खिलाफ दीनदयाल नगर थाना, रायपुर में अपराध क्रमांक 441/2025 दर्ज किया गया है। इस पर धारा 147, 148, 61 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 17, 18, 19, 20, 38, 39, 40 विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 (UAPA) के तहत कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को माननीय विशेष न्यायालय (एनआईए), बिलासपुर में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) को जांच सौंपी गई
इस प्रकरण को छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय के आदेश पर आगे की विवेचना के लिए राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) को हस्तांतरित किया गया है। SIA की टीम अब इस मामले की गहराई से जांच करेगी ताकि राजधानी में सक्रिय माओवादी नेटवर्क और उनके सहयोगियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। पुलिस का मानना है कि शहरों में छिपकर काम कर रहे माओवादी कैडर न केवल संगठन को आर्थिक मदद देते हैं, बल्कि शहरी इलाकों में युवाओं को बरगलाकर उन्हें संगठन से जोड़ने का प्रयास भी करते हैं।
नक्सल रणनीति का अहम हिस्सा है शहरी नेटवर्क
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि माओवादी संगठन का शहरी नेटवर्क उसकी रणनीति का अहम हिस्सा होता है। यह नेटवर्क नक्सलियों को ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों से बाहर निकलकर शहरों में सप्लाई चेन, चिकित्सा सुविधा, हथियार और रसद उपलब्ध कराता है। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस नेटवर्क को तोड़ने पर फोकस कर रही हैं। रायपुर जैसे बड़े शहरों में माओवादियों की सक्रियता चिंता का विषय है, क्योंकि यहां से संगठन के लिए आर्थिक और लॉजिस्टिक सपोर्ट आसानी से जुटाया जा सकता है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई और आगे की जांच
रायपुर पुलिस और SIA अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि दंपत्ति के संपर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। मोबाइल फोन और बरामद सामग्री से पुलिस को कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपियों ने रायपुर में रहते हुए किन लोगों से संपर्क किया और क्या शहर में माओवादियों के अन्य ठिकाने भी मौजूद हैं। घटना के बाद राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और सतर्कता और बढ़ा दी गई है। पुलिस चौकियों और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि माओवादियों के शहरी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने तक अभियान जारी रहेगा।
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