नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: रुपकुमारी चौधरी

छग

Update: 2026-04-12 14:02 GMT
Mahasamund. महासमुंद। महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर महासमुंद में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता आयोजित की गई। सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रुपकुमारी चौधरी ने इस अधिनियम को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी पहल बताया। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सांसद रुपकुमारी चौधरी ने कहा कि यह अधिनियम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा। उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

सांसद ने कहा कि अब महिलाएं केवल सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इससे देश के विकास को नई दिशा मिलेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह अधिनियम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे शासन-प्रशासन में अधिक प्रभावी तरीके से योगदान दे सकेंगी। इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राचार्य शशि प्रभा थ्रिटे ने भी इस पहल की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय नारी शक्ति के सम्मान और उनके अधिकारों को मजबूती देने वाला है। उनके अनुसार, इस अधिनियम से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगी। प्रेसवार्ता के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित किया गया है। यह अधिनियम प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए लागू किया जाएगा, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में जिले के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे और इस अधिनियम को लेकर अपने विचार साझा किए। देशभर में इस कानून को लेकर चर्चा तेज हो गई है और इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सांसद ने अंत में कहा कि यह अधिनियम न केवल महिलाओं को राजनीतिक मंच पर आगे लाएगा, बल्कि समाज में समानता और संतुलन स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
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