हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास, उधारी विवाद में टांगी से की थी हत्या
छग
Raigarh. रायगढ़। रायगढ़ जिले में हत्या के एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश विरेंद्र के न्यायालय ने 24 मार्च को आरोपी सूरज राठिया (22) निवासी ग्राम आमगांव थाना धरमजयगढ़ को दोषी पाते हुए उम्रकैद से दंडित किया। यह मामला थाना पूंजीपथरा क्षेत्र के विंध्याचल ऑक्सीजन प्लांट की लेबर कॉलोनी में पिकअप चालक विरेन्द्र खम्हारी की हत्या से जुड़ा है। घटना 22 अगस्त की रात की है, जब मृतक विरेन्द्र खम्हारी (30) निवासी ग्राम लुकापारा सरिया और आरोपी सूरज राठिया, जो उसी प्लांट में खलासी के रूप में काम करता था, के बीच पैसों को लेकर विवाद हो गया। दोनों लेबर कॉलोनी में अलग-अलग क्वार्टर में रहते थे और पहले उनके संबंध सामान्य थे। घटना के दिन उधारी के पैसों को लेकर शुरू हुआ विवाद अचानक बढ़ गया और गुस्से में आकर आरोपी ने टांगी से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल विरेन्द्र को मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी पूंजीपथरा निरीक्षक राकेश मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और फरार आरोपी की तलाश तेज कर दी। इसी दौरान आरोपी सूरज राठिया अपने क्वार्टर में सामान लेने लौटा, जहां पहले से घेराबंदी कर रही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और बताया कि उसने पैसों के विवाद में हमला किया था। इस मामले की प्रारंभिक विवेचना निरीक्षक राकेश मिश्रा द्वारा की गई, जिसके बाद जांच की जिम्मेदारी सहायक उप निरीक्षक जयराम सिदार को सौंपी गई। विवेचना अधिकारी जयराम सिदार ने मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों, घटनास्थल से जुटाए गए प्रमाण, एफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के बयान को सशक्त तरीके से संकलित किया। सभी महत्वपूर्ण साक्षियों के बयान न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
गवाहों के कथन मजबूत रहे, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत हुआ। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक वंदना केशरवानी ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने न्यायालय में तथ्यों और साक्ष्यों को सटीक तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे आरोपी के खिलाफ मामला साबित हुआ और उसे कठोर सजा मिली। यह मामला भारतीय न्याय संहिता के तहत मजबूत विवेचना और सटीक अभियोजन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। एसएसपी शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में जिले में विवेचना की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष पहल की गई है। इसके तहत विवेचकों के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है, जहां जांच से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता है। इस पहल के कारण मामलों की जांच में सुधार आया है और अपराधियों को सजा दिलाने में सफलता मिल रही है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस की विवेचना का मुख्य उद्देश्य आरोपियों को उनके अपराध के अनुसार कड़ी सजा दिलाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत विवेचना ही न्याय की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और इसी के आधार पर पीड़ितों को न्याय मिल सकता है।