Raipur Breaking: NDPS केस में बड़ा फैसला, तीन आरोपियों को 15-15 साल की सजा
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Raipur. रायपुर। विशेष दांडिक प्रकरण (एनडीपीएस) क्र. 68/2022 में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाम गोपाल कृष्ण व अन्य मामले में सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया कि आरोपियों का अपराध गंभीर प्रकृति का है और उन्हें किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा सकती। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की परिस्थितियों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत के अनुसार यह अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर है और इसके प्रति उदारता बरतना उचित नहीं होगा।
तीनों आरोपियों को कठोर सजा
न्यायालय ने इस मामले में गोपाल कृष्ण वर्मा पिता हरिराम वर्मा, हरिश कुमार चतुर्वेदी पिता नाथूराम तथा सतनाम सिंह पिता नाजिर सिंह को स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 (NDPS Act) की धारा 21(C) के तहत दोषी पाया। अदालत ने तीनों आरोपियों को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 1,50,000 रुपये (एक लाख पचास हजार रुपये) का अर्थदंड भी लगाया गया है।
जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि आरोपी निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक आरोपी को तीन-तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना पड़ेगा।
जेल में बिताए समय का मिलेगा लाभ
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले के अन्वेषण और सुनवाई के दौरान आरोपियों द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को उनकी सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। यह लाभ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 428 के तहत दिया जाएगा।
2022 में हुई थी गिरफ्तारी
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले में आरोपियों को 7 मार्च 2022 को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही मामला न्यायालय में विचाराधीन था और लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया है।
नशे के खिलाफ सख्त संदेश
इस फैसले को नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए अत्यंत हानिकारक हैं और ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले से नशे के अवैध व्यापार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश जाएगा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।