नारायणपुर में बड़ी सफलता, 28 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण

छग

Update: 2025-11-25 16:21 GMT
Narayanpur. नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में सुरक्षा बलों और प्रशासन को लगातार बड़ी सफलताएं मिल रही हैं। हिंसा का रास्ता छोड़कर माओवादी अब समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं। इसी कड़ी में आज “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत नारायणपुर जिले में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई, जहां कुल 28 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 19 महिला माओवादी भी शामिल हैं। इन सरेंडर करने वाले कैडरों पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

कई स्तरों के माओवादी कैडर हुए पुनर्वासित
आज आत्मसमर्पित होने वाले 28 माओवादी विभिन्न इकाइयों में सक्रिय थे। इनमें ऊपरी से निचले स्तर तक के सक्रिय सदस्य शामिल हैं, जैसे—
Maad Division DVCM Member
PLGA कंपनी नंबर 06 के मिलिट्री सदस्य
एरिया कमेटी सदस्य (ACM)
टेक्निकल टीम सदस्य
मिलिट्री प्लाटून PPCM और सदस्य
SZCM भास्कर की गार्ड टीम — पार्टी सदस्य (PM)
सप्लाई टीम और एलओएस सदस्य (PM)
जनताना सरकार के विभिन्न स्तरों के सदस्य
इन माओवादियों का आत्मसमर्पण यह स्पष्ट करता है कि संगठन के भीतर मनोबल तेजी से कमजोर हो रहा है और सरकारी पुनर्वास नीतियों पर विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

हथियार भी किए जमा—बड़ा संकेत
सरेंडर करने वाले तीन माओवादी कैडरों ने अपने पास मौजूद SLR, INSAS और 303 राइफलें भी सुरक्षा बलों को सौंप दीं। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि हिंसा से दूरी बनाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास का मजबूत संकेत है।

2025 में अब तक 287 माओवादी कर चुके आत्मसमर्पण
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रोबिन्सन गुड़िया ने बताया कि आज की कार्रवाई के साथ साल 2025 में जिले में अब तक कुल 287 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह आंकड़ा माओवाद संगठन में बढ़ती निराशा और सुरक्षा बलों के प्रभावी अभियान का प्रमाण है।

माओवादी विचारधारा का अंत निकट—बस्तर IG
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पत्तिलिंगम ने इस सफलता को माओवादी संगठन के पतन की बड़ी निशानी बताया। उन्होंने कहा कि नारायणपुर में 28 कैडरों का पुनर्वास यह दर्शाता है कि हिंसक और जनविरोधी माओवादी विचारधारा का अंत अब निकट है। उन्होंने कहा कि लोग “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल पर भरोसा जताते हुए शांति, गरिमा और स्थायी प्रगति का मार्ग चुन रहे हैं। IG ने यह भी बताया कि पिछले 50 दिनों में पूरे बस्तर रेंज में 512 से अधिक माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जो ऐतिहासिक उपलब्धि है।

वरिष्ठ माओवादी अब भी जंगलों में, लेकिन विकल्प सीमित
IG पत्तिलिंगम ने कहा कि संगठन के शेष सक्रिय वरिष्ठ नेता—
Politburo सदस्य देवजी
Central Committee सदस्य रामदर
DKSZC सदस्य पाप्पा राव
देवा (Barse Deva)
अब मुश्किल हालात में हैं। उनके पास हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

सरकार और सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता
छत्तीसगढ़ शासन, भारत सरकार, स्थानीय प्रशासन और बस्तर पुलिस क्षेत्र में शांति स्थापना, पुनर्वास और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। आज हुए सरेंडर ने माओवादी उन्मूलन अभियान को नई दिशा और गति प्रदान की है।
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