रायपुर में फर्जी ITC का बड़ा खुलासा, 27.80 करोड़ के घोटाले में सिंडिकेट बेनकाब

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Update: 2026-04-29 14:53 GMT
Raipur. रायपुर। वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (DGGI) रायपुर की टीम ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि M/s Shristi Construction नामक फर्म के जरिए बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के केवल कागजी बिल जारी कर करोड़ों रुपये का फर्जी आईटीसी लिया और पास किया गया। इस पूरे मामले में करीब 27.80 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन का पता चला है, जिससे कर प्रणाली को बड़ा नुकसान पहुंचा है। जांच एजेंसी के अनुसार इस फर्म के माध्यम से ₹17.18 करोड़ का फर्जी आईटीसी खुद लिया गया, जबकि ₹10.62 करोड़ की राशि अन्य फर्मों को ट्रांसफर की गई। यह पूरा लेनदेन बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के किया गया, जिसमें केवल बिलिंग के आधार पर टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया गया।

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां जीएसटी प्रणाली के नियमों का गंभीर उल्लंघन हैं। इस मामले में पहले ही एक मुख्य आरोपी चंदन गुप्ता को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पूछताछ और जांच के दौरान इस पूरे सिंडिकेट के पीछे रोहन तन्ना नामक व्यक्ति को मुख्य मास्टरमाइंड बताया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि रोहन तन्ना का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह वर्ष 2021 में लगभग सात करोड़ रुपये के जीएसटी चोरी मामले में भी गिरफ्तार हो चुका था। फिलहाल वह उस मामले में जमानत पर बाहर था। DGGI के अधिकारियों के अनुसार यह मामला केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम, 2017 की धारा 16 का उल्लंघन है, जिसमें बिना वास्तविक आपूर्ति के आईटीसी का लाभ लेना गैरकानूनी माना गया है। चूंकि इस मामले में राशि करोड़ों में है, इसलिए इसे धारा 132 के तहत संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच अभी जारी है और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और फर्मों की पहचान की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में कई अन्य फर्जी कंपनियां शामिल हो सकती हैं, जो इसी तरह के तरीके से कर चोरी में शामिल रही हों। विभाग द्वारा संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की जा रही है। इस कार्रवाई को कर चोरी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है और भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। कर व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए ऐसे अवैध नेटवर्क पर रोक लगाना जरूरी है। फिलहाल जांच एजेंसी का फोकस मुख्य आरोपी रोहन तन्ना की भूमिका को स्पष्ट करने और उससे जुड़े अन्य कड़ियों को सामने लाने पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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