CGPSC घोटाले में बड़ी कार्रवाई: पूर्व सचिव, परीक्षा नियंत्रक समेत 5 आरोपी गिरफ्तार
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को रायपुर स्थित स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां CBI की ओर से 14 दिन की रिमांड की मांग की गई है। मामले में सुनवाई फिलहाल जारी है।
जिन 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया
गिरफ्तार आरोपियों में पीएससी की पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पीएससी के पूर्व सचिव और रिटायर्ड IAS जीवनलाल ध्रुव, उनके बेटे सुमित ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आदिल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि आरती वासनिक पर प्रश्न पत्र लीक कराने का आरोप है। पहले भी CBI ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन तब सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया था। माना जा रहा है कि हाल ही में मिले नए दस्तावेज और सबूतों के आधार पर यह गिरफ्तारी की गई है।
अब तक 12 लोग गिरफ्तार
इस घोटाले में अब तक कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 18 नवंबर को CBI ने तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के निदेशक श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 10 जनवरी को 5 और आरोपियों को हिरासत में लिया गया था। इनमें नितेश सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष का भतीजा व डिप्टी कलेक्टर चयनित), ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, PSC), शशांक गोयल, भूमिका कटियार (दोनों डिप्टी कलेक्टर चयनित) और साहिल सोनवानी (डीएसपी चयनित) शामिल हैं। ये सभी फिलहाल जेल में बंद हैं।
2020 से 2022 की भर्ती प्रक्रियाओं पर सवाल
यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख रखने वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों की अनदेखी करते हुए डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर मनमाने तरीके से चयन किया गया।
साजिश का तरीका
जांच एजेंसी को मिले साक्ष्यों के अनुसार, प्रश्न पत्र लीक करने, इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने और फर्जी मेरिट लिस्ट तैयार करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। इससे यह साबित होता है कि आयोग के कुछ अधिकारियों और बाहरी रसूखदार लोगों ने मिलकर सुनियोजित तरीके से यह घोटाला किया।
CBI की जांच जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने इसे सीबीआई को सौंपा था। जांच एजेंसी ने अब तक कई जगह छापेमारी कर दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए हैं। सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला संगठित तरीके से अंजाम दिया गया और इसमें कई स्तर पर मिलीभगत रही। PSC की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने के बाद से अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि मेहनत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला और पद उन लोगों को दे दिए गए जिनके पास राजनीतिक या प्रशासनिक पहुंच थी। अभ्यर्थियों की मांग है कि पूरी पारदर्शिता के साथ नई भर्ती प्रक्रिया कराई जाए।