Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है। ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने 1 सितंबर 2026 को प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इसी जांच के सिलसिले में ईडी ने उत्कर्ष चंद्राकर को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। ईडी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई। जांच की शुरुआत EOW-ACB रायपुर और CBI-ACB रायपुर में दर्ज दो एफआईआर के आधार पर की गई थी।

2020 और 2021 की परीक्षाओं की जांच
ईडी के अनुसार, एफआईआर में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी सहित अन्य लोगों पर वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितता, हेरफेर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षाओं के प्रश्नपत्र कुछ आरोपियों के रिश्तेदारों और चुनिंदा अभ्यर्थियों तक निजी बिचौलियों के माध्यम से पहुंचाए गए। इसके बदले कथित रूप से रकम ली गई और डिप्टी कलेक्टर तथा डिप्टी एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयन कराने का प्रयास किया गया।

3 करोड़ से अधिक की रकम का दावा
ईडी ने अपनी जांच के आधार पर दावा किया है कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC-2021 परीक्षा का कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से नकद रकम वसूली। एजेंसी के मुताबिक, जांच में 3 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय का पता चला है। इसमें से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए जाने की बात जांच में सामने आई है। इन आरोपों और रकम के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की ईडी जांच कर रही है।

प्रभावशाली लोगों के नाम के इस्तेमाल का आरोप
ईडी का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रभावित करने और उनसे रकम वसूलने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक केके चंद्रवंशी के नाम, पद और कथित प्रभाव का इस्तेमाल किया। इसके अलावा तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ एक विशेष कर्तव्य अधिकारी के प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है। ये ईडी की जांच में सामने आए आरोप हैं और मामले में आगे की जांच जारी है।

डिजिटल साक्ष्यों के बाद गिरफ्तारी
इससे पहले ईडी ने 3 जून 2026 को भी इस मामले में तलाशी अभियान चलाया था। एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों, मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका की जांच की गई। ईडी ने दावा किया कि जांच में उत्कर्ष चंद्राकर की कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़ी गतिविधियों में संलिप्तता के साक्ष्य मिले। इसके बाद उसे 1 सितंबर को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।

पांच ठिकानों पर तलाशी
एक सितंबर की कार्रवाई के दौरान ईडी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक केके चंद्रवंशी से जुड़े ठिकाने सहित अन्य स्थानों पर तलाशी ली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD चेतन बोरघरिया और रिटायर्ड पटवारी कमलेश राजपूत से जुड़े ठिकानों पर भी दबिश दिए जाने की जानकारी है। ईडी के मुताबिक, तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज समेत अन्य सामग्री जब्त की गई है। एजेंसी अब जब्त डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। CGPSC भर्ती परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की आगे की जांच जारी है।
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