शराब घोटाला: CBI ने AP त्रिपाठी और पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज की

छग

Update: 2026-04-16 17:29 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आबकारी विभाग के पूर्व विशेष सचिव और तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी तथा उनकी पत्नी मंजूला त्रिपाठी के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह FIR दिल्ली स्थित CBI की एंटी करप्शन ब्रांच (STB) द्वारा दर्ज की गई है। CBI की जांच में आरोप लगाया गया है कि अरुणपति त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ में प्रतिनियुक्ति के दौरान अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध रूप से बड़ी संपत्ति अर्जित की। जांच रिपोर्ट के अनुसार उनकी घोषित संपत्ति लगभग 38 लाख रुपये से बढ़कर करीब 3.32 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। एजेंसी का कहना है कि यह वृद्धि उनकी वैध आय के स्रोतों से मेल नहीं खाती, जिसके चलते यह मामला अनुपातहीन संपत्ति का बनता है। इस मामले में उनकी पत्नी मंजूला त्रिपाठी की भूमिका भी जांच के दायरे में रखी गई है।

CBI अब दोनों के बैंक खातों, संपत्तियों, निवेश और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि जल्द ही कई और दस्तावेजों को खंगाला जाएगा और जरूरत पड़ने पर पूछताछ भी की जाएगी। इसी बीच शराब घोटाले से जुड़े व्यापक नेटवर्क की भी जांच तेज कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में 30 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच पहले से चल रही है। CBI और अन्य एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित घोटाले की पूरी संरचना किस तरह से काम कर रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इस मामले में करीब 3200 करोड़ रुपये से अधिक का कथित शराब घोटाला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पहले दर्ज FIR में भी इसी तरह के बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। ED के अनुसार, यह घोटाला तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से संचालित किया गया। जांच रिपोर्टों में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, तत्कालीन आबकारी एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर जैसे नामों का उल्लेख भी सामने आया है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को तीन हिस्सों—A, B और C कैटेगरी में बांटकर संचालित किया गया था।

A कैटेगरी के तहत डिस्टलरी संचालकों से कमीशन वसूली की व्यवस्था बताई गई है। आरोपों के अनुसार, 2019 में प्रति पेटी 75 रुपये और बाद में 100 रुपये तक कमीशन लिया गया। साथ ही टेंडर प्रक्रिया में शराब की कीमतें बढ़ाकर नुकसान की भरपाई की गई और ओवरबिलिंग की अनुमति देकर सिस्टम को नियंत्रित किया गया।
B कैटेगरी में नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों में अतिरिक्त शराब की बिक्री का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि डिस्टलरी मालिकों से अतिरिक्त शराब बनवाई गई और उस पर नकली होलोग्राम लगाकर बाजार में खपाया गया। इस कार्य में होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता, और परिवहन व्यवस्था से जुड़े अरविंद सिंह तथा अमित सिंह के नाम भी सामने आए हैं। जांच में यह भी दावा किया गया है कि प्रदेश के 15 जिलों को विशेष रूप से शराब खपाने के लिए चयनित किया गया था। दुकानदारों को कथित रूप से निर्देश दिए गए कि वास्तविक बिक्री का पूरा रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज न किया जाए।

शुरुआती चरण में प्रति पेटी 2880 रुपये की कीमत तय थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 3840 रुपये कर दिया गया। C कैटेगरी में देशी शराब की सप्लाई व्यवस्था में हेरफेर का आरोप है। CSMCL की दुकानों को 8 जोन में विभाजित कर टेंडर प्रक्रिया में कमीशन आधारित प्रणाली अपनाने का दावा किया गया है। आरोप है कि जोन निर्धारण में भी आर्थिक लाभ के आधार पर बदलाव किए गए। EOW की जांच में यह भी दावा किया गया है कि तीन वित्तीय वर्षों में देशी शराब सप्लाई के नाम पर लगभग 52 करोड़ रुपये ‘पार्ट C’ के रूप में सिंडिकेट को दिए गए। CBI की इस ताजा कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एजेंसी अब पूरे वित्तीय नेटवर्क, संपत्ति स्रोतों और लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
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