Bilaspur. बिलासपुर। पीएमश्री आत्मानंद विद्यालय मस्तूरी में पदस्थ लेक्चरर संजय पांडेय के वेतन से काटी गई जीपीएफ राशि खाते में जमा नहीं किए जाने का मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंचा। लेक्चरर ने याचिका दायर कर स्कूल के प्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाए थे। मामले में हाई कोर्ट द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने रिपोर्ट पेश की। इसके बाद काटी गई राशि जीपीएफ खाते में जमा कर दी गई। ब्याज के संबंध में उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।
याचिकाकर्ता संजय पांडेय पीएमश्री आत्मानंद विद्यालय मस्तूरी में लेक्चरर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने हाई कोर्ट में दायर याचिका में बताया कि स्कूल के प्राचार्य टी संवर्ग जयप्रकाश ओझा द्वारा उनके वेतन से सीजीपीएफ के नाम पर राशि की कटौती की जा रही थी, लेकिन कथित रूप से यह राशि उनके संबंधित खाते में जमा नहीं कराई जा रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि वेतन से कटौती के बावजूद राशि जमा नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। संजय पांडेय ने दावा किया कि चार वर्ष से अधिक समय से राशि पर शासन द्वारा निर्धारित ब्याज का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पाया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस संबंध में उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन और निवेदन किया। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने हाई कोर्ट से वेतन से जीपीएफ के नाम पर काटी गई पूरी राशि और उस पर निर्धारित ब्याज उनके जीपीएफ खाते में जमा कराने की मांग की। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर को नोटिस जारी कर प्रकरण के संबंध में जवाब पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट का नोटिस मिलने के बाद डीईओ ने मामले की जांच कर स्कूल के प्राचार्य को याचिकाकर्ता के जीपीएफ खाते में वेतन से काटी गई पूरी राशि जमा कराने के निर्देश दिए।
डीईओ के निर्देश के बाद संबंधित राशि लेक्चरर संजय पांडेय के जीपीएफ खाते में जमा करा दी गई। हालांकि देरी के कारण मिलने वाले ब्याज का मामला बाकी रहा। इस संबंध में कोष लेखा एवं पेंशन विभाग से मार्गदर्शन लेने की बात कही गई। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से हाई कोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत कर पूरे मामले की जानकारी दी गई। डीईओ ने कोर्ट को बताया कि निर्धारित समय पर राशि सीजीपीएफ खाते में जमा नहीं होने के कारण ब्याज की गणना में अंतर आ सकता है।
डीईओ ने वरिष्ठ कोषालय अधिकारी के पत्र का उल्लेख करते हुए हाई कोर्ट को आश्वस्त किया कि याचिकाकर्ता को ब्याज का आर्थिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। कोर्ट के समक्ष विभाग की ओर से दिए गए इस जवाब के बाद मामले में मूल राशि जमा किए जाने का विवाद समाप्त हो गया। हाई कोर्ट ने ब्याज की गणना से संबंधित मामले के लिए याचिकाकर्ता को संचालनालय कोष लेखा एवं पेंशन छत्तीसगढ़ के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है। याचिकाकर्ता अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत ब्याज की गणना और उससे संबंधित राशि के लिए विभाग के समक्ष अपना पक्ष रख सकेगा। डीईओ की रिपोर्ट, जीपीएफ की मूल राशि जमा किए जाने और ब्याज का नुकसान नहीं होने देने के आश्वासन को देखते हुए हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।