फैक्ट्रियों में कारखाना अधिनियम उल्लंघन पर 9.7 लाख रुपए का जुर्माना, लेबर कोर्ट ने सुनाया फैसला
छग
Raigarh. रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कारखाना अधिनियमों के उल्लंघन के मामलों में औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई के बाद तीन उद्योगों को कुल 9 लाख 70 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई पिछले दिनों फैक्ट्रियों में हुई निरीक्षण और घटनाओं के आधार पर की गई। सूचना के अनुसार, औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग ने जिले की फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया, जिसमें कई सुरक्षा मानकों और कारखाना अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। उल्लंघन की गंभीरता को देखते हुए संबंधित मामलों को लेबर कोर्ट में भेजा गया, जहां कोर्ट ने फैसले के तहत जुर्माने की राशि तय की।
पहला मामला: सब्यसाची बंद्योपाध्याय अधिभोगी मेसर्स जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, यूनिट-4 (MLSM), खरसिया रोड, रायगढ़ को कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 7a(2)(d) का उल्लंघन करने पर 70 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
दूसरा मामला: मेसर्स एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड के अधिभोगी प्रदीप कुमार डे और कारखाना प्रबंधक संजय सिंह परिहार ने धारा 7a(2)(a) और धारा 21(1)(4) का उल्लंघन किया। इस पर कोर्ट ने 3 लाख 20 हजार रुपए का जुर्माना तय किया।
तीसरा मामला: प्रदीप कुमार डे और संजय सिंह परिहार, मेसर्स एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड ने धारा 41 और नियम 73(घ), 73(1) का उल्लंघन किया। श्रम न्यायालय ने इस पर 2 लाख 80 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
चौथा मामला: एमएसपी फैक्ट्री के अन्य उल्लंघन में प्रदीप कुमार डे, अधिभोगी, और मेसर्स एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड को धारा 7a(2)(d) और 7a(2)(a) के उल्लंघन पर 1 लाख 60 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
पाँचवां मामला: विवेकचंद्र उपाध्याय, मेसर्स आरएस इस्पात (रायगढ़) प्राइवेट लिमिटेड के अधिभोगी और कारखाना प्रबंधक ने धारा 7a(2)(a) और धारा 21(1)(4) का उल्लंघन किया। इस पर श्रम न्यायालय ने 1 लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
इस फैसले के बाद औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा नियमों और कारखाना अधिनियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने फैक्ट्रियों के प्रबंधन को चेतावनी दी है कि सभी सुरक्षा मानकों और कर्मचारियों के अधिकारों का पालन अनिवार्य है। कारखाना अधिनियम उल्लंघन के इन मामलों से यह संदेश गया कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा, श्रमिक कल्याण और नियामक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। लेबर कोर्ट के जुर्माने का यह निर्णय न केवल उल्लंघन करने वालों के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र के लिए अनुशासन कायम करने का उदाहरण भी है। औद्योगिक निरीक्षण और लेबर कोर्ट के आदेशों के बाद फैक्ट्रियों के प्रबंधन अब सुरक्षा मानकों, कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों के अनुपालन पर अधिक ध्यान देंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई श्रमिकों के हित और औद्योगिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।