कृषि मंत्री राम विचार नेताम का यादव होटल में आत्मनिर्भर भारत से साक्षात्कार

छग

Update: 2025-06-07 17:01 GMT
Raipur. रायपुर। राजधानी की एक विशेष यात्रा के दौरान आज रायपुर के समीप ग्राम मड़ई में स्थित ‘यादव होटल’ पर एक ऐसा मधुर पड़ाव हुआ, जिसने केवल स्वाद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर दी। यह पड़ाव न केवल एक ठहराव था, बल्कि जीवन, परिश्रम और संस्कृति से भरा एक प्रेरणादायक अनुभव बन गया। ग्राम मड़ई स्थित ‘यादव होटल’ वर्षों से ग्रामीण स्वाद और सेवा भावना के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन आज की इस यात्रा में उस होटल की आत्मा से एक सीधा संवाद हुआ — वहां की प्रबंधक माताजी से। उनकी सादगी, आत्मीयता और आत्मनिर्भरता से भरपूर बातचीत ने मानवीय भावनाओं को गहराई से छू लिया। एक ओर जहाँ उनके चेहरे पर सतत परिश्रम की रेखाएँ थीं, वहीं दूसरी ओर
आत्मविश्वास
और संतोष की चमक भी स्पष्ट झलक रही थी। उनकी बातचीत में कोई दिखावा नहीं था, बस एक साधारण ग्रामीण महिला का सहज व्यवहार, जो कठिन परिश्रम को अपना धर्म मानती हैं और अपने कार्य से संतोष प्राप्त करती हैं। उन्होंने बताया कि यह होटल उन्होंने वर्षों पूर्व अपने पति के सहयोग से प्रारंभ किया था, और अब वे स्वयं इसकी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इस छोटे से होटल को वे न केवल व्यवसाय के रूप में, बल्कि सेवा के रूप में भी देखती हैं। यह होटल, एक सामान्य चाय-पकौड़ी की दुकान से कहीं बढ़कर है। यहाँ की रबड़ी और पेड़े, केवल मिठाई नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति का स्वाद हैं। उनमें न केवल गाय के ताजे दूध का मिठास था, बल्कि मिट्टी की सोंधी सुगंध और एक ग्रामीण आत्मा की सौंधी महक भी महसूस हो रही थी।

जब रबड़ी की पहली चम्मच मुंह में गई, तो मानो किसी कहानी के पन्ने खुल गए। एक ऐसी कहानी, जिसमें आत्मनिर्भरता, परिश्रम और संस्कृति की मिठास घुली हुई थी। इस अनुभव ने यह सोचने पर मजबूर किया कि आत्मनिर्भर भारत का सपना केवल शहरों की ऊंची इमारतों में नहीं, बल्कि गांव की इन मिट्टी से सनी दुकानों, इन समर्पित हाथों और इन आत्मविश्वासी आंखों में पल रहा है। आज जब देश भर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की बात की जाती है, तब ऐसे छोटे-छोटे व्यवसाय, जो सीमित संसाधनों में भी गुणवत्ता और स्वाभिमान का प्रतीक हैं, वास्तव में नायक के रूप में सामने आते हैं। ‘यादव होटल’ न केवल स्वाद का केंद्र है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता का जीता-जागता उदाहरण भी है। यह दिखाता है कि यदि अवसर और मंच मिले, तो ग्रामीण भारत की महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं। यह अनुभव हमें यह भी सिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी हुई संभावनाओं को केवल आंकड़ों या योजनाओं के माध्यम से नहीं समझा जा सकता, बल्कि वहाँ जाकर, वहाँ के लोगों से मिलकर, उनके संघर्ष और संवेदनाओं को महसूस करके ही जाना जा सकता है। ‘यादव होटल’ पर बिताए गए ये कुछ पल वास्तव में जीवन के उन दुर्लभ अनुभवों में से एक बन गए, जो आत्मा को स्पर्श कर जाते हैं। यह केवल एक पड़ाव नहीं था, यह एक यात्रा थी — स्वाद से संस्कृति तक, परिश्रम से आत्मनिर्भरता तक, और मिट्टी से स्वाभिमान तक। आख़िर में यही कहा जा सकता है कि जब भी आप रायपुर की ओर आएं और ग्राम मड़ई के पास से गुजरें, तो ‘यादव होटल’ पर रुकिए — वहाँ आपको केवल रबड़ी और पेड़ा नहीं मिलेगा, वहाँ एक कहानी मिलेगी, एक प्रेरणा मिलेगी, और मिलेगा आत्मनिर्भर भारत का असली चेहरा।
Tags:    

Similar News