कोल लेवी के बाद आबकारी घोटाले में कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल गिरफ्तार, 3 दिन की रिमांड
आरोपियों को आमने-सामने बैठाने के बावजूद डायरी का सच कोसों दूर
शराब घोटाला में आरोपी नंबर 20 आबकारी अधिकारी विभाग का मु यकर्ता धर्ता, एफआईआर के बावजूद पूछताछ नहीं
शराब घोटाले के सभी आरोपियों को आमने सामने बैठाकर स ती से पूछताछ होने पर ही सच्चाई आएगी सामने
शराब घोटाले के सभी आरोपियों को अलग-अलग न्यायालयों से राहत मिलने से मामला कमजोर होता दिख रहा है इससे भी आरोपी बेखौफ है
आरोपी रामगोपाल अग्रवाल को भी बहुत जल्द राहत मिलने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता, परिवारजन भी इसे लेकर आश्वस्त दिख रहे
रायपुर (जसेरि)। कोल लेवी घोटाले के बाद अब आबकारी घोटाला मामले में कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने गिर तार किया है। कोल लेवी घोटाले में पहले से गिर तार रामगोपाल अग्रवाल की 14 दिन की रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें एसीबी/ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत में पेश किया गया।
जानकारी के मुताबिक, श्वह्रङ्ख ने आबकारी घोटाले में पूछताछ के लिए रामगोपाल अग्रवाल की 5 दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी। मामले की सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने श्वह्रङ्ख को 3 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की है। अब श्वह्रङ्ख 25 जुलाई तक रामगोपाल अग्रवाल से आबकारी घोटाले से जुड़े मामले में पूछताछ करेगी।
बताया जा रहा है कि रामगोपाल अग्रवाल को कोल लेवी घोटाले में पहले ही गिर तार किया जा चुका है। इसी मामले में उनकी 14 दिन की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था। इसके बाद श्वह्रङ्ख ने आबकारी घोटाले में उनकी गिर तारी की और पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की। अब जांच एजेंसी तीन दिनों तक रामगोपाल अग्रवाल से आबकारी घोटाले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी।
अनवर ढेबर के सामने रामगोपाल को बैठाकर की गई थी पूछताछ
बताया जा रहा है कि रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ के बाद आबकारी घोटाले में कई और नए तथ्य सामने आ सकते हैं। बता दें कि मंगलवार को श्वह्रङ्ख ने उन्हें केंद्रीय जेल लेकर गई थी, जहां पहले से न्यायिक हिरासत में बंद शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर के सामने बैठाकर पूछताछ की गई थी। इसके अलावा अकाउंटेंट देवेंद्र डडसेना को भी आमने-सामने बैठाकर करीब तीन घंटे तक पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए थे। बताया जा रहा है कि ईओडब्ल्यू अब इस मामले में सूर्यकांत तिवारी समेत तीन अन्य आरोपियों को भी रामगोपाल अग्रवाल के सामने बैठाकर पूछताछ कर सकती है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कथित शराब घोटाले के मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मु यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने जांच एजेंसी के खिलाफ हाईकोर्ट की प्रतिकूल टिप्पणियों को अनावश्यक बताते हुए उन्हें खारिज कर दिया। यह मामला कथित तौर पर 2,161 करोड़ रुपए के शराब घोटाले से जुड़ा है। बुधवार को भारत के मु य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले में सुनवाई की। बेंच ने कहा कि इस मामले से जुड़े कानूनी मुद्दे कोर्ट के सामने अभी भी खुले रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के आदेशों को रद्द करने के बारे में जरूरी कानूनी सवाल भी उठाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या सिर्फ इसलिए जमानत के आदेश रद्द कर दिए जाने चाहिए, क्योंकि उनमें पर्याप्त कारण नहीं बताए गए हैं। बेंच ने आपराधिक मुकदमों को पूरा करने पर ध्यान देने के बजाय जमानत के आदेशों को चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। बघेल की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने जमानत रद्द करने की बढ़ती कार्यवाही का जिक्र करते हुए इस बात से सहमति जताई। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने भी माना कि कानूनी रूप से गलत जमानत आदेश जरूरी नहीं कि किसी आरोपी की आजादी को रद्द करने को सही ठहराए। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने की याचिका खारिज करने का फैसला किया। इसी बीच, सीनियर एडवोकेट जेठमलानी ने कहा कि हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी के खिलाफ गैर-जरूरी स त टिप्पणियां की थीं। कोर्ट ने हाईकोर्ट की ओर से जांच एजेंसी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को यह कहकर हटा दिया कि यह टिप्पणियां पूरी तरीके से अनावश्यक थी। हाईकोर्ट ने शराब घोटाले के मामले में चुनिंदा गिर तारियां करने और पिक एंड चूज का तरीका अपनाने के लिए राज्य की आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की आलोचना की थी। दरअसल, कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल को जनवरी में जमानत दी थी। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ईडी और राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका में दलील दी गई कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद से मामले का कोई भी मु य गवाह सामने आने से डर रहा है। सीबीआई और ईडी दोनों इस मामले में जांच कर रही हैं। ईडी का दावा है कि इस तथाकथित घोटाले में 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने से भारी गड़बड़ी की गई।
प्राइमवन वर्कफोर्स के दो निदेशकों को हाईकोर्ट से जमानत
शराब घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजीव जैन और राजीव द्विवेदी को जमानत दे दी है। अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और अधिकांश साक्ष्य दस्तावेजी हैं, जिनसे छेड़छाड़ की संभावना बेहद कम है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्रवर्तन निदेशालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर अपराध दर्ज किया था।
जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड की शराब दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों ने अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर फर्जी बिल तैयार किए और करोड़ों रुपये का भुगतान प्राप्त किया। आरोप है कि अतिरिक्त भुगतान का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों को अवैध लाभ पहुंचाने में इस्तेमाल किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि दोनों निदेशकों के नाम मूल एफआईआर में नहीं थे और उनके खिलाफ रिश्वत देने का कोई प्रत्यक्ष आरोप भी नहीं है। यह भी तर्क दिया गया कि कंपनी का संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था। दोनों निदेशकों ने जांच में पूरा सहयोग किया है और मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए जमानत का विरोध किया था।