तिरंगे का अपमान: कोरबा जिले में एसपी की गाड़ी में उल्टा लगा तिरंगा

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Update: 2025-08-13 16:52 GMT
Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15 अगस्त की तैयारियों का जायजा लेने के लिए कोरबा जिले के एसपी सिद्धार्थ तिवारी और कलेक्टर अजीत वसंत सीडल ग्राउंड पहुंचे थे। इस दौरान एसपी की आधिकारिक गाड़ी के आगे लगे तिरंगे ने सबका ध्यान खींच लिया—क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज उल्टा लगा हुआ था।
घटना से फैला आक्रोश
उल्टे तिरंगे को देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। राष्ट्रीय ध्वज का इस तरह प्रदर्शित होना न केवल भारत के ध्वज संहिता (Flag Code of India) का उल्लंघन है, बल्कि यह देश के सम्मान के साथ खिलवाड़ भी माना जाता है। तिरंगा, भारत की एकता, अखंडता और स्वतंत्रता का प्रतीक है, और उसका सही ढंग से प्रदर्शन करना हर नागरिक और सरकारी अधिकारी का कर्तव्य है।
गंभीर लापरवाही या अनजाने में हुई गलती?
लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि यह घटना लापरवाही का नतीजा है या राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति संवेदनहीनता का। प्रशासनिक स्तर पर होने वाले इस तरह के कृत्य से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या झंडा केवल औपचारिक आयोजनों तक ही सीमित हो गया है, और क्या अधिकारी स्वयं ध्वज संहिता के प्रावधानों से परिचित नहीं हैं।
ध्वज संहिता का उल्लंघन
भारत के ध्वज संहिता के अनुसार, तिरंगे को हमेशा सही दिशा में, सम्मानपूर्वक और नियमों के अनुरूप फहराना अनिवार्य है।
केसरिया (ऊपरी रंग) हमेशा ऊपर होना चाहिए।
अशोक चक्र बीच में स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए।
उल्टा ध्वज राष्ट्रीय अपमान की श्रेणी में आता है, जिसके लिए कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
जांच और कार्रवाई की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल जांच और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कई लोगों ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय गरिमा से जुड़ा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्वतंत्रता दिवस से पहले संवेदनशील मुद्दा
यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा हुआ है। 15 अगस्त, वह दिन है जब देश अपने वीरों की कुर्बानियों को याद करता है और तिरंगे के नीचे अपनी एकजुटता प्रदर्शित करता है। ऐसे में राष्ट्रीय ध्वज के साथ इस तरह का व्यवहार और भी चिंताजनक हो जाता है।
पूर्व में भी हुए हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है जब उल्टा तिरंगा या ध्वज संहिता के उल्लंघन की खबर आई हो। कई बार ऐसे मामले राजनीतिक रैलियों, सरकारी आयोजनों और यहां तक कि खेल प्रतियोगिताओं में भी सामने आ चुके हैं। हालांकि, जब ऐसा प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हो, तो इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
राष्ट्रीय सम्मान का सवाल
तिरंगा सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि यह देश की आत्मा और संविधानिक मूल्यों का प्रतीक है। इसके साथ लापरवाही करना देश की गौरवपूर्ण विरासत का अनादर करना है। प्रशासन के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि राष्ट्रध्वज के सम्मान के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाए।
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