ऑयल पाम और उद्यानिकी फसल से किसान लक्ष्मीकांत साहू की आय में वृद्धि

छग

Update: 2026-04-17 12:50 GMT
Mahasamund. महासमुंद। जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम बेलडीह के किसान लक्ष्मीकांत साहू ने आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। पहले उनकी 3.00 हेक्टेयर बंजर भूमि से उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिलता था, क्योंकि यह जमीन धान जैसी पारंपरिक फसलों के लिए उपयुक्त नहीं थी। लगातार कम उत्पादन और आय के कारण खेती उनके लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने केंद्र सरकार की नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल- ऑयल पाम योजना के तहत अपनी भूमि पर ऑयल पाम की खेती शुरू करने का निर्णय लिया। इस निर्णय में उन्हें उद्यानिकी विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता मिली। विभाग की ओर से उन्हें पौधरोपण, बोरवेल, फेंसिंग और ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाओं पर अनुदान भी प्रदान किया गया, जिससे प्रारंभिक निवेश का बोझ काफी कम हुआ।

लक्ष्मीकांत साहू ने बताया कि पहले उनकी जमीन से पर्याप्त उत्पादन नहीं मिल पाता था, लेकिन ऑयल पाम की खेती शुरू करने के बाद स्थिति में सुधार आने लगा। इस फसल के साथ उन्होंने खेत में खाली जगह का उपयोग करते हुए अंतरवर्तीय फसल प्रणाली अपनाई और बैगन तथा करेला की खेती शुरू की। इससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिला और भूमि का बेहतर उपयोग संभव हुआ। बैगन की फसल से उन्हें विशेष रूप से अच्छा लाभ प्राप्त हुआ। प्रति एकड़ लगभग 110 क्विंटल उत्पादन हुआ, जिसे उन्होंने लगभग 12 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बाजार में बेचा। इस बिक्री से उन्हें लगभग 82 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। यह आय उनकी कुल कृषि आय में महत्वपूर्ण योगदान बन गई। करेला की फसल ने भी उन्हें अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की।

ड्रिप सिंचाई प्रणाली के उपयोग से पानी की बचत हुई और फसलों को आवश्यक मात्रा में नियमित रूप से पानी मिल सका। वहीं फेंसिंग व्यवस्था के कारण फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई और नुकसान की संभावना कम हुई। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उनकी खेती अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ बन गई है। उनकी इस सफलता ने आसपास के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। गांव और क्षेत्र के किसान अब ऑयल पाम जैसी नकदी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और नई तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
उद्यानिकी विभाग
के अधिकारी भी मानते हैं कि इस तरह की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने और बंजर भूमि के उपयोग के लिए प्रभावी मॉडल बन सकती है। लक्ष्मीकांत साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि किसान सही योजना, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी सहायता का उपयोग करें तो कम उपजाऊ भूमि को भी आय का मजबूत साधन बनाया जा सकता है। उनकी खेती ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सशक्त किया है, बल्कि क्षेत्र में कृषि के प्रति नई सोच भी विकसित की है।
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