Balrampur. बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के प्रभाव से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग द्वारा भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताए जाने के बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को जिले के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, बेमौसम बारिश से किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। खेतों और खलिहानों में रखी धान की फसल के भीगने से नुकसान की आशंका बनी हुई है।

कलेक्टर के निर्देश पर सभी स्कूलों में छुट्टी
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मौसम की खराब स्थिति और लगातार बारिश को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालयों में अवकाश का आदेश जारी किया है। यह आदेश जिले के सभी शासकीय और अशासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों के लिए लागू किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारी बारिश के दौरान स्कूल आने-जाने में विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए 29 अक्टूबर को अवकाश घोषित किया गया है।

मौसम विभाग ने जताई भारी बारिश की आशंका
बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का प्रभाव छत्तीसगढ़ के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 29 अक्टूबर को बलरामपुर-रामानुजगंज सहित उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्नब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यनम तट से गुजरा था। इसके बाद यह कमजोर पड़ने लगा, लेकिन इसके प्रभाव से कई क्षेत्रों में बारिश की स्थिति बनी हुई है। लगातार बारिश के चलते प्रशासन ने नागरिकों से सतर्कता बरतने की अपील की है।

खेतों में पड़ी धान की फसल पर मंडराया खतरा
बेमौसम बारिश का सबसे अधिक असर किसानों की तैयार फसल पर पड़ने की आशंका है। बलरामपुर जिले में कई किसान धान की कटाई के बाद उपज को खेतों में सुखाने और मिंजाई की तैयारी में जुटे हुए थे। इसी बीच लगातार बारिश शुरू होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में कटाई के बाद रखी गई धान की फसल के भीगने का खतरा है। वहीं, खलिहानों में जमा धान को सुरक्षित रखना भी किसानों के लिए चुनौती बन गया है। किसानों के सामने अब सबसे बड़ी समस्या तैयार उपज को नमी से बचाने की है। यदि बारिश का सिलसिला लंबे समय तक जारी रहता है, तो फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

धान में फफूंद और दाने खराब होने की आशंका
कृषि के जानकारों के अनुसार, कटाई के बाद धान की फसल लंबे समय तक गीली रहने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अत्यधिक नमी के कारण धान के दाने खराब होने, उनका रंग बदलने और फफूंद लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा गीली फसल की मिंजाई और भंडारण में भी परेशानी आ सकती है। ऐसे में किसानों के लिए उपज को सुरक्षित स्थान पर रखना और बारिश से बचाना जरूरी हो गया है।

अभिभावकों और ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील
जिला प्रशासन ने खराब मौसम को देखते हुए अभिभावकों से बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। बच्चों को नदी-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाली जगहों के आसपास नहीं जाने देने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने नागरिकों से भी अनावश्यक जोखिम नहीं उठाने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने को कहा है। फिलहाल बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में बारिश को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। एक ओर विद्यालयों में छुट्टी घोषित कर विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, वहीं दूसरी ओर किसानों के सामने अपनी तैयार धान की फसल को सुरक्षित बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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