गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में अवैध पेड़ कटाई का खुलासा, डिप्टी रेंजर पर गंभीर आरोप

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Update: 2025-06-22 13:37 GMT
Korea. कोरिया। टाइगर रिजर्व घोषित गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के सोनहत पार्क वन परिक्षेत्र में वर्षों से चल रही अवैध पेड़ कटाई अब संगठित वन तस्करी नेटवर्क का रूप ले चुकी है। आमा बीट में संचालित इस तस्करी में विभागीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। डिप्टी रेंजर वीरेंद्र सिंह, जो पिछले 15 वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ हैं, इस नेटवर्क की संभावित कड़ी के रूप में चिन्हित किए जा रहे हैं।

लकड़ी तस्करी का बड़ा नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पार्क क्षेत्र के कीमती वृक्षों को काटकर बैकुंठपुर, बिश्रामपुर और सूरजपुर जैसे इलाकों में बेचा जा रहा है। यह कार्य आम तस्करी नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत का परिणाम बताया जा रहा है। आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारी खुद के ट्रैक्टरों का उपयोग कर रातों-रात लकड़ी परिवहन कर रहे हैं, जिसकी भनक तक किसी को नहीं लगती। सोनहत के विभिन्न बीटों में बड़े पैमाने पर काटे गए वृक्षों के ठूंठ खुलेआम देखे जा सकते हैं, जो इस जंगल हत्याकांड की मूक गवाही देते हैं। इन जमीनी साक्ष्यों से साफ है कि पेड़ों की अवैध कटाई योजनाबद्ध तरीके से की जा रही है।


पुराने घोटालों का गढ़ बन चुका है यह क्षेत्र
सोनहत पार्क वन परीक्षेत्र में पहले भी कई घोटाले उजागर हो चुके हैं, जिनमें वृक्षारोपण घोटाला, स्टॉप डैम घोटाला, लेंटाना सफाई घोटाला और विभागीय भवन निर्माण में भ्रष्टाचार प्रमुख हैं। लेकिन सबसे खतरनाक और सतत रूप से जारी है — इमारती लकड़ियों की अवैध तस्करी, जिस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों, पर्यावरणविदों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोप है कि वन विभाग के संरक्षण में यह तस्करी हो रही है, जिससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र की जैव विविधता पर घातक प्रभाव पड़ सकता है।

इकोसिस्टम पर मंडरा रहा है खतरा
गौरतलब है कि गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व है। यहां शेर, तेंदुआ, भालू, बारहसिंगा, चिंकारा जैसे दुर्लभ जीवों का प्राकृतिक वास है। लगातार वृक्ष कटाई से न सिर्फ इन वन्य प्राणियों का आश्रय समाप्त हो रहा है, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अब निर्णायक कार्रवाई की दरकार है। यदि जल्द कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया, तो यह क्षेत्र एक सुनियोजित जंगल विनाश की मिसाल बनकर रह जाएगा।
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