मरवाही में सरई वृक्षों की अवैध कटाई, वन संपदा को खतरा

छग

Update: 2026-02-22 12:04 GMT
Marwahi. मरवाही। मरवाही जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र कटरा के ढपनीपानी एवं गवरखोज प्लॉट क्रमांक 1086 में बड़े सरई (साल) वृक्षों की अवैध कटाई का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों ने बताया कि चार साल पुराने बड़े पेड़ कटे हुए पाए गए, जिससे वन संपदा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अवैध कटाई की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में हर समय वन संपदा की कटाई होती रहती है। फलदार और हरे-भरे वृक्षों के लगातार कटने से वन संपदा के संरक्षण को गंभीर खतरा है।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अवैध कटाई की शिकायत वन विभाग के आला अधिकारियों से की जाती है, लेकिन अधिकारी मामले को टाल-मटोल कर फाइलों में दबा देते हैं। कई बार उच्च अधिकारी इसे राजस्व विभाग के पेड़ बताकर जिम्मेदारी टाल देते हैं। इस वजह से आदिवासी बहुल क्षेत्रवासियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। वन परिक्षेत्र मरवाही के डिप्टी रेंजर शिवशंकर तिवारी से सवाल किया गया कि सरई वृक्षों की कटाई कैसे हुई और क्या इसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इस पर डिप्टी रेंजर ने मीडिया के सामने बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने स्पष्ट किया कि मरवाही वन परिक्षेत्र कार्यालय में मीडिया को जानकारी देने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है।

ग्रामीणों और स्थानीय पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि अवैध कटाई पर रोक नहीं लगी तो न केवल वन संपदा का विनाश होगा, बल्कि स्थानीय जैव विविधता भी खतरे में पड़ेगी। सरई के अलावा अन्य हरे और फलदार वृक्ष भी लगातार कटते जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और भविष्य में वन संपदा की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए। ग्रामीण चाहते हैं कि वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर इस मुद्दे को प्राथमिकता दें और कटाई के पीछे जिम्मेदारों को दंडित किया जाए। वन संपदा के संरक्षण की जरूरत पर जोर देते हुए स्थानीय नेताओं ने भी प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि वन संपदा सिर्फ सरकारी संपत्ति नहीं है, बल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों की जीवन शक्ति और स्थानीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है।
Tags:    

Similar News