Jagdalpur. जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी कांड मामले में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। बुधवार को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो गई। लगातार तीन दिनों तक चली अंतिम बहस में अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने रखीं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद विशेष अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने अब 31 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख तय की है। इस फैसले पर राजनीतिक दलों के साथ ही पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

मामले में अंतिम बहस की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हुई थी। सोमवार को अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष अंतिम दलीलें पेश की गईं। इसके बाद मंगलवार को बचाव पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए अंतिम जिरह की। बुधवार को सुनवाई के तीसरे दिन विशेष अदालत ने एक बार फिर बचाव पक्ष की दलीलों को सुना। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से जवाबी दलीलें पेश की गईं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 31 अगस्त की तारीख घोषित कर दी। झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी और चर्चित नक्सली घटनाओं में से एक है। 25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में माओवादियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों की जान चली गई थी। घटना ने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को सौंपी गई थी। NIA की जांच के अनुसार झीरम घाटी हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 35 लोग घायल हुए थे। जांच के दौरान चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। इसके अलावा करीब 150 से 200 अन्य माओवादियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया। जांच एजेंसी ने इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि शेष 10 आरोपियों के खिलाफ NIA की विशेष अदालत में सुनवाई चल रही थी। झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा गुजर रही थी। इसी दौरान पहले से घात लगाकर बैठे माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया था। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित महेंद्र कर्मा समेत कांग्रेस के कई
प्रमुख नेताओं
की जान चली गई थी। हमले में सुरक्षाबलों के जवान और आम नागरिक भी मारे गए थे।

इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा भूचाल आया था और हमले को लेकर लंबे समय तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित NIA की विशेष अदालत में चल रही थी। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपने-अपने पक्ष में दलीलें और साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए। अब अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत के फैसले का इंतजार है। बुधवार को अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया से बातचीत में अदालत के फैसले का इंतजार करने की बात कही। करीब 13 साल पुराने इस मामले में 31 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। NIA की विशेष अदालत के फैसले से गिरफ्तार आरोपियों के संबंध में न्यायिक स्थिति स्पष्ट होगी। झीरम घाटी हमला आज भी छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और नक्सल हिंसा से जुड़ी सबसे गंभीर घटनाओं में गिना जाता है। ऐसे में विशेष अदालत के आने वाले फैसले पर पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और प्रदेश की जनता की नजर बनी हुई है।
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