Baloda Bazar. बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र में सामने आए फर्जी स्थानांतरण आदेश मामले में गिरफ्तार आरोपियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो डॉक्टर भी शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच के दौरान दोनों डॉक्टरों ने पेट दर्द और दस्त की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार करने और उससे जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को पकड़ा गया है। गिरफ्तार आरोपियों में डॉक्टर करण देवांगन और डॉक्टर राजेश सेन के अलावा अन्य लोग भी शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद नियमानुसार सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराया जाना था।
मेडिकल जांच के लिए जब दोनों डॉक्टरों को अस्पताल ले जाया गया, तभी उन्होंने अचानक पेट दर्द और दस्त की शिकायत बताई। चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी। इसके बाद दोनों डॉक्टरों को जिला अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। इस घटनाक्रम के बाद शहर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आमतौर पर पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के पश्चात न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जाता है। लेकिन इस मामले में गिरफ्तार डॉक्टरों के अस्पताल में भर्ती होने से लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं कि क्या बीमारी वास्तव में गंभीर थी या फिर गिरफ्तारी के बाद अचानक सामने आई स्वास्थ्य समस्या ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया।
हालांकि, चिकित्सकीय जांच के आधार पर अस्पताल में भर्ती करने के फैसले पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। किसी भी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का निर्णय डॉक्टरों की रिपोर्ट और जांच के आधार पर ही किया जाता है। पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से भी यही कहा गया है कि दोनों आरोपियों को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भर्ती कराया गया था। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा ने बताया कि पलारी अस्पताल से मिली मेडिकल रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के बाद दोनों आरोपियों को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दोनों की स्थिति सामान्य है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें दोबारा न्यायालय में पेश किया जा सकता है।
फर्जी स्थानांतरण आदेश मामले की जांच पुलिस द्वारा लगातार जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि फर्जी आदेश तैयार करने के पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था और आरोपियों ने किस उद्देश्य से इस तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों में डॉक्टरों के शामिल होने से मामला और चर्चा में आ गया है। अब पुलिस की जांच के साथ-साथ मेडिकल रिपोर्ट भी अहम भूमिका निभाएगी। यदि दोनों आरोपियों की स्थिति ठीक रहती है तो उन्हें आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए कोर्ट में पेश किया जाएगा। फिलहाल बलौदाबाजार पुलिस फर्जी ट्रांसफर आदेश मामले में जांच आगे बढ़ा रही है। वहीं, डॉक्टरों के अस्पताल में भर्ती होने की घटना ने इस मामले को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
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