EOW/ACB ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन में करोड़ों के कंप्यूटर घोटाले का चालान किया पेश
छग
Raipur. रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन में वर्ष 2010-11 और 2011-12 के दौरान कंप्यूटर उपकरणों की खरीदी में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय में चालान पेश किया है। इस मामले में अपराध क्रमांक 38/16 के तहत धारा 420, 467, 468, 471 और 120 (बी) भारतीय दंड संहिता (भादवि) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। विस्तृत जांच के बाद सोमवार, 16 मार्च को रायपुर के विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया गया।
जांच में सामने आया कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत कंप्यूटर समर्थित योजना के तहत राज्य के 18 जिलों की शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं को एलएफडी/टीएफटी कंप्यूटर युक्त उपकरण उपलब्ध कराए जाने थे। इसके लिए दो चरणों में कुल 638 मॉनिटर की मांग की गई थी। इसमें वर्ष 2010-11 में 246 मॉनिटर और वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर शामिल थे। मामले में मिनी इंफोटेक, रायपुर के संचालक आलोक कुशवाहा ने वर्ष 2010-11 में 246 मॉनिटर की आपूर्ति की, जबकि ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन, रायपुर द्वारा वर्ष 2011-12 में 392 मॉनिटर सप्लाई किए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपराधिक षड़यंत्र के तहत HP और एग्माटेल कंपनियों के फर्जी और कूटरचित ऑथराइजेशन लेटर तैयार कर शासन को गुमराह किया।
सबसे बड़ा खुलासा मॉनिटर की कीमतों में भारी गड़बड़ी से हुआ। जिन मॉनिटरों का बाजार मूल्य लगभग 57,950 रुपये प्रति नग था, उन्हें शासन को 1,26,500 रुपये प्रति नग की दर से सप्लाई किया गया। इस तरह फर्जी दस्तावेजों और मिलीभगत के जरिए शासन को कुल 4,72,88,462 रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। विवेचना के बाद EOW/ACB ने आरोपी आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा के खिलाफ विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया है। वहीं मामले से जुड़े शासकीय अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को अनुशंसा भी भेजी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। EOW/ACB की सक्रिय जांच और त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि राज्य सरकार के धन के साथ होने वाले वित्तीय गड़बड़ी और घोटालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषक मानते हैं कि इस कार्रवाई से सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। शासकीय विभागों को भी यह चेतावनी मिली है कि वे अनुचित धनशोधन या फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं।