बकरीद शुभकामना पोस्टर विवाद, अमित जोगी की शिकायत पर FIR दर्ज

छग

Update: 2026-06-01 14:07 GMT
Gaurela-Pendra-Marwahi. गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित बकरीद शुभकामना पोस्टर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी की शिकायत पर गौरेला थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की मदद से तकनीकी जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें अमित जोगी की तस्वीर के साथ बकरीद की शुभकामनाएं दर्शाई गई थीं। आरोप है कि पोस्टर में बकरे के साथ गाय की तस्वीर भी शामिल की गई थी, जिसके बाद यह मामला विवादों में आ गया।

इस पोस्टर के वायरल होने के बाद स्थानीय हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया। संगठनों का कहना था कि इस प्रकार की सामग्री से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसके बाद विभिन्न संगठनों ने मामले में कार्रवाई की मांग की थी। विवाद बढ़ने पर अमित जोगी ने स्वयं सामने आकर कहा कि वायरल पोस्टर फर्जी और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसा कोई पोस्टर जारी नहीं किया गया था। उनके अनुसार, किसी ने उनकी ईद-उल-अज़हा की शुभकामना पोस्ट में छेड़छाड़ कर उसे गलत तरीके से वायरल किया है।

अमित जोगी ने आरोप लगाया कि यह कृत्य राजनीतिक द्वेष और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा जिले में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। बाद में अमित जोगी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एफआईआर की प्रति साझा करते हुए लिखा कि डिजिटल माध्यमों में छिपकर गलत सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके ईद शुभकामना संदेश के साथ छेड़छाड़ कर गाय और बकरे की तस्वीर जोड़कर गलत संदेश फैलाने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 336(3), 356(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत कार्रवाई की जा रही है।

उनके अनुसार, साइबर जांच के जरिए डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाएंगे और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत जवाबदेह बनाया जाएगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल पोस्टर के मूल स्रोत का पता लगाने के लिए साइबर सेल सक्रिय कर दी गई है। तकनीकी जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि पोस्टर किसने तैयार किया और किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए इसे फैलाया गया। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच के बाद संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह मामला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली भ्रामक सामग्री को लेकर एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस और साइबर सेल अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि जिम्मेदार लोगों तक पहुंचा जा सके।
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