Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दुर्गोत्सव के समापन अवसर पर बुधवार शाम भव्य और आकर्षक झांकियों के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। शहर की सड़कों पर आस्था, भक्ति और उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ, खाटू श्याम का दरबार, लड्डू गोपाल, भगवान शिव की बारात, गंगा अवतरण और श्रवण कुमार की झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। बुधवार शाम शुरू हुआ विसर्जन का सिलसिला पूरी रात चलता रहा और गुरुवार सुबह करीब 7 बजे तक जारी रहा। झांकियां देखने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, जिसके चलते शहर में कई स्थानों पर 3 से 5 किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई।
75 साल पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा
बिलासपुर में दुर्गा प्रतिमा स्थापना की परंपरा करीब 75 साल पुरानी है। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की। शहर के विभिन्न चौक-चौराहों, मोहल्लों और पंडालों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। दुर्गोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता को विदाई दी। करीब 48 साल पुरानी परंपरा के अनुसार दुर्गोत्सव समितियों ने आकर्षक झांकियों के साथ विसर्जन शोभायात्रा निकाली।
पूरी रात सड़कों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
बुधवार शाम शहर की विभिन्न दुर्गोत्सव समितियां अपनी झांकियों और प्रतिमाओं के साथ विसर्जन के लिए निकलीं। शोभायात्राएं देवकीनंदन चौक, सिम्स चौक और हटरी चौक से होते हुए पचरीघाट पहुंचीं। रंग-बिरंगी रोशनी, डीजे, धुमाल और ढोल-ताशों की धुन पर श्रद्धालु रातभर झूमते रहे। जगह-जगह सामाजिक संगठनों और विभिन्न समितियों ने मंच लगाकर शोभायात्राओं का स्वागत किया। विसर्जन के लिए जबलपुर, राजनांदगांव और गोंदिया से विशेष झांकियां मंगाई गई थीं। वहीं प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए बैंड और धुमाल दलों ने आयोजन को और आकर्षक बनाया।
शिव बारात और गंगा अवतरण की झांकियां बनीं आकर्षण
दुर्गा विसर्जन के दौरान धार्मिक कथाओं पर आधारित झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। भगवान शिव की बारात में ब्रह्मा, विष्णु और भूतगणों के नृत्य का दृश्य प्रस्तुत किया गया। भगवान शिव की जटाओं से निकलती गंगा मैया की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा भगवान हनुमान को लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाते हुए दर्शाया गया। खाटू श्याम का दरबार, लड्डू गोपाल और भगवान जगन्नाथ की झांकियों ने भी श्रद्धालुओं को आकर्षित किया।
माता के 51 स्वरूपों का किया गया प्रदर्शन
मध्य नगरी दुर्गोत्सव समिति ने अपने 50वें वर्ष को यादगार बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। समिति की शिव-सती झांकी में माता के 51 स्वरूपों को दर्शाया गया। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, यह झांकी राजनांदगांव से मंगाई गई थी। वहीं गोंदिया से मां गंगा के धरती पर अवतरण को दर्शाने वाली भागीरथी झांकी मंगाई गई। माता-पिता की सेवा का संदेश देने के उद्देश्य से श्रवण कुमार की झांकी भी प्रस्तुत की गई।
3 से 5 किलोमीटर तक लगा जाम
झांकियां देखने के लिए बिलासपुर के अलावा रायपुर, कोरबा, मुंगेली और जांजगीर-चांपा सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भारी भीड़ के चलते शहर के प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लगा रहा। कई स्थानों पर लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। पचरीघाट के साथ छठघाट पर भी दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
सिंदूर खेला के साथ माता को दी विदाई
विनोबा नगर, तोरवा और अन्य क्षेत्रों के बंगाली पंडालों में महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को विदाई दी। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। साईं परिसर में भी दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, गरबा और नृत्य आयोजित किए गए। इस तरह बिलासपुर में दुर्गोत्सव का समापन भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्साह के साथ हुआ।